झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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कप्तान गार्डन झासी-स्थित अङ्गरेजी सेना का एक अफ़सर था। हिन्दी खूब सीख ली थी। राजा गङ्गाधरराव के पास कभी-कभी आया करता था। राजा उसको अपना मित्र समझते थे। वह पूरा अङ्गरेज था। साहित्यिक, व्यापार-कुशल, स्वदेश-प्रेमी और भारतवर्ष को घृणा या अवहेलना की वृत्ति से देखने वाला। परन्तु भारतवर्ष के राजाओ के सहलाने-फुसलाने की क्रिया का अभ्यासी—अपने कर्तव्य पालन में दृढ। राजा से मिलने, गार्डन घोडे पर और कभी तामझाम में बैठकर आता था। नवाबो को दावते-दावते थोडी नवाबी भी अङ्गरेजो में आ गई थी। हुक्का, सुरा, रडियो का नाच, होली-फाग, दशहरा, दिवाली, ईद उत्सव इत्यादि नवाबो, राजाओ और जनता में हेलमेल बनाये रखने के लिये बर्ते जाते थे। परन्तु वे उनमें दूध-पानी नही हुये थे—उनकी सतर्क दृष्टि इङ्ग्लैंड की ओर बराबर मुडी रहती थी। राजा ने और कोई मनोरञ्जन समक्ष न देखकर, एक दिन गार्डन को बुलवाया। यह तामझाम में नगर वाले महल पर आया। वहाँ से राजा उसको किले वाले महल पर ले चले। राजा अपने तामझाम में बैठे। उत्तरी फाटक से जाना चाहते थे। बडी हथसार के नीचे से मार्ग था।* एक हाथी पागल हो गया। इन तामझामो की ओर दौडा। वाहको ने तामझाम कन्धो पर से उतार दिये। परन्तु भागे नहीं। उनकी कमर में तलवारें थी। म्यानो से निकाल लीं। गार्डन के पास कोई हथियार न था। वह हक्कावक्का सा इन मजदूरो के पास आ गया। राजा के पास तलवार थी। उन्होने नही छुई। तामझाम से बाहर निकलकर दौड़ते हुये प्रमत्त हाथी की, अपनी ओर आती हुई गति को देखने लगे। गार्डन ने कहा, 'बचो।' मजदूरो ने कहा, 'बचो।'
*इसी हथसार की जगह अब सदर अस्पताल है।