रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)
Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary
शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसप्तमः पटलः । १०५ कालिकांरहितो रक्तः शिखिकंठ¹समाकृतिः ॥ ४३ ॥ सस्यो मयूरतुत्थं स्यात्² वह्निकृत् कालनाशनः³ । रसायने तु योग्यः स्याद्⁴ वयस्तम्भकरो भवेत् ॥ ४४ ॥ सस्यकः शुद्धिमाप्नोति रक्तवर्गेण भावितः⁵ ॥ ४५ ॥ ॥ इति सस्यकशुद्धिः ॥ दरदस्त्रिविधः प्रोक्त⁶श्चर्मांरः शुकतुण्डकः⁷ । हंसपादस्तृतीयः स्याद्⁸ गुणवानुत्तरोत्तरः९ ॥ ४६ ॥ चूर्णपारदभेदेन¹⁰ द्विविधो दरदः पुनः ॥ ४७ ॥
(1) K has शिखिकंस. M has शिखिकर्षिं. But रस.स. has मयूरकण्ठसच्छायं. Chap. II. v. 127. (2) B has तुल्य स्याद्. K has तुल्य स्या. M has तुर्थस्य. All the readings are gram. incorrect. (3) B reads कलताशनः, which has no clear sense. K reads वह्निकृद्वह्निनाशनः. (4) B and K have योग्य स्याद्. M has योग्यस्स्याद्. Both are gram. inc. (5) K and M read रसवर्गेण, which is evidently an error; because we find in रस.स. रक्त- वर्गेण, which is supported by the MS. B. M has भावितम्, which is gram. erroneous. [Vide रस.स. Chap. II. v. 130.] (6) दरदस्त्रिविधो रक्त, a variant in B and M. (7) B has चर्मांरशुकटण्डकः. M has चर्माभः शुकदण्डकः. (8) B and M read इसपादस्तु लेपः स्यात्. [रस.स. reads हंसपाकः. Vide Chap. III. v. 139.] (9) All the MSS. have उत्तरोत्तरम्; but since दरद is written in the masculine gender, it ought to have an adjective in the same gender. (10) K reads भेदानि. M reads दारद. Both are inc. 14