भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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द्वादशः पटलः । २०९ भ्रमन्ति पशवो मूढ़ाः¹ कुलोषधिविवर्जिताः² । द्वयौषधि³रसानाञ्च नैव सिद्धिः प्रजायते ॥ ७१ ॥ तस्मात् सर्व्वप्रयत्नेन ज्ञातव्या तु कुलोषधी⁴ ॥ ७२ ॥ दिव्यौषधी चतुःषष्टिः⁵ कुलमध्ये व्यवस्थिता⁶ । नैव जानन्ति मूढ़ास्ते⁷ देवमोहेन⁸ मोहिताः ॥ ७३ ॥ यदिव्यासु द्वयौषध्यो⁹ जायन्ते¹⁰ गिरिगह्वरे ॥ ७४ ॥ द्वयौषध्या रसे सूतं¹¹ नैव बद्धं कदाचन¹² । (1) D reads भ्रमन्ति पश्य मे मूढ़ा. K reads भ्रभंतो पशवो मूढ़ाः, where- in the first term is inc. (2) कुलोषधीविवर्जिताः, a variant in D. (3) D has वलौषधी. K has द्वयौषधी. M has द्रोण्यौषधि. (4) D reads erroneously ज्ञातव्यो तु कुलोषधीः. K reads also incorrectly ज्ञात- व्यास्तु कुलोषधीः. M reads ज्ञातव्या तु कुलीयधीः, which is incorrect. (5) दिव्यौषधीश्चतुषष्टी, a variant in D and K, which is incorrect. M reads दिव्यौषधि चतुष्षष्टि, which is also incorrect. (6) K reads व्यवस्थिताः, which is not correct M reads कूलमध्ये which is incor- rect. (7) नैव जान्ति मूढ़ा सा, a variant in D. K reads नैव जानाति मूढ़ास्ते, which is grammatically incorrect. M reads नैव जानन्ति मूढ़ास्तान्. (8) D and K read erroneously शिवमयेव, which ought to be शिवमाययेव. (9) D has यादिव्यास्तु वनीवध्या, which is grammatically incorrect. M has also an incorrect variant—यादि- व्यास्रु मवौषद्यो. (10) D reads जायते, which is incorrect. (11) D has वनीवधीरसे सूत. द्वह्योषध्या विक्षीणास्ते, a variant in M. Both are incorrect. (12) K reads बंधं, which is incorrect. मञ्- जारयन्ति ते. a variant in M. 27