रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४८ रस्तरङ्गिणी मिर्च, पीपल ), छोटी कटैली, हरड़ और धनिया इसके समभाग चूर्ण के साथ रससिन्दूर का प्रयोग करना चाहिये । मदात्यय रोग में हींग, अजवाइन, सौंठ, चव्य, धनिया और सौंचलनमक चूर्ण के साथ रससिन्दूर का सेवन करना चाहिये । परिणाम शूल रोग में रससिन्दूर को जवाखार और सुहागा मिलाकर प्रयोग करना चाहिये । रक्तप्रदर में इसको प्रतिदिन दो बार वासाक्वाथ अथवा लोध्रकषाय के साथ प्रयोग करने से आराम आता है । मूत्राशय के बस्ति-कुण्डल रोग में रससिन्दूर को त्रिफलाक्वाथ अथवा काञ्जी के साथ सेवन कराना चाहिये और क्वाथ और काञ्जी में सैन्धानमक मिलाकर पिलाना चाहिये । बालकों के नव ज्वर और प्रतिश्याय ( जुकाम ) में इसको तुलसीपत्र स्वरस के साथ प्रयोग करना चाहिये । बच्चों के श्वास-कास में इसे छोटी कटैली के स्वरस के साथ देना चाहिये । यहाँ पर भिन्न रोगों पर रससिन्दूर का प्रयोग करने के लिए यद्यपि अनेक प्रकार के अनुपान तथा सहपानों का उल्लेख किया गया है । किन्तु सहपान तथा अनुपान का कोई नियम न होने से उसी सह- पान अनुपान को देश काल की अवस्थानुसार दूसरे रोग में दे सकते हैं । यह सहपान तथा अनुपान की कल्पना चिकित्साकुशल वैद्य के ऊपर निर्भर होती है अर्थात् वैद्य अपनी बुद्धि से इनके स्थान पर दूसरे सहपान-अनुपान कल्पित कर सकता है अथवा इन्हींको उल्लिखित रोगों में प्रयोग कर सकता है॥२०३-२३४॥ अथ रससिन्दूरस्य मात्रा एकहायनदेशीयं बालकं वीक्ष्य रोगिणम् । गुञ्जायाः षोडशो भागस्तत्र मात्रा प्रकल्प्यते ॥२३५॥ तथा द्विवर्षदेशीये सप्तमो भाग इष्यते । रसहायनदेशीये तृतीयं भागमाहरेत् ॥२३६॥ द्वादशाब्दजदेशीये गुञ्जार्द्धं परिकल्पयेत् । गुञ्जामात्रािमता चास्य पूर्णमात्रा प्रशस्यते ॥२३७॥ अथास्य मात्रानिरूपणम्—एकहायनदेशीयमिति प्रकारे देशीयर् प्रत्ययः । एकवर्षकल्पमित्यर्थः । रसहायनदेशीये षड्वर्षवयस्के, अस्य च तरुणपुरुषयोग्या पूर्णमात्रा गुंजैकमिति ॥ २३५-२३७ ॥ भा.टी.—एक वर्ष की आयुवाले रोगी बालक के लिए रससिन्दूर की मात्रा रत्ती का सोलहवाँ भाग निश्चित करना चाहिये । दो वर्ष के बालक के लिए रत्ती का सातवाँ भाग समझना चाहिये । ६ वर्ष की आयुवाले बालक की रससिन्दूर मात्रा रत्ती का तीसरा भाग समझना चाहिये । बारह वर्ष