रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ २२ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ शंख द्राव २६० | अपर प्रकार ३०१ शंखद्राव का गुण २६१ | गुण और मात्रा ,, द्वितीय शंख द्राव २६२ | वराटिका का आमयिक प्रयोग ३०२ द्वितीय शंख द्राव का गुण ,, | शृङ्ग का नाम ,, तृतीय शंख द्राव २६३ | ग्राह्य शृङ्ग का स्वरूप ३०३ चतुर्थ सजल शंख द्राव ,, | शृङ्ग का मारण ,, चतुर्थ सजल शंख द्राव की मात्रा २६४ | शृंगभस्म का आमयिक प्रयोग ,, क्षुद्र शंख ( घोंघा ) का नाम ,, | समुद्रफेन का नाम ३०४ क्षुद्र शंख का शोधन ,, | समुद्रफेन का शोधन ,, क्षुद्र शंख का मारण ,, | समुद्रफेन के गुण और मात्रा ३०५ क्षुद्र शंख का गुण ,, | समुद्रफेन का आमयिक प्रयोग ,, क्षुद्र शंख का आमयिक प्रयोग २६५ | समुद्र फेन की उत्पत्ति ३०६ शुक्ति का नाम २६५ | त्रयोदशतरङ्ग शुक्ति का शोधन ,, | यवक्षार का नाम ३०७ शुक्ति का द्वितीय शोधन २६६ | यवक्षार का निर्माण ,, शुक्ति का मारण ,, | यवक्षार का गुण ३०८ शुक्ति भस्म की मात्रा ,, | यवक्षार की मात्रा ,, शुक्ति भस्म का आमयिक प्रयोग २६७ | यवक्षार का आमयिक प्रयोग ,, जल शुक्ति का नाम २६८ | निम्बूकाम्लीय यवक्षार का नाम ३११ जल शुक्ति का शोधन मारण ,, | निम्बूकाम्लीय यवक्षार का निर्माण ३१२ जल शुक्ति का गुण ,, | निम्बूकाम्लीय यवक्षार का गुण ,, वराट का नाम २६६ | निम्बूकाम्लीय यवक्षार की मात्रा ३१३ वराट के भेद ,, | निम्बूकाम्लीय यवक्षार का आमयिक प्रयोग ,, ग्राह्य वराटिका स्वरूप ,, | सज्जीखार का नाम ,, वराटिका शोधन ३०० | सज्जीखार का निर्माण ,, द्वितीय शोधन ,, | सज्जीखार का गुण ३१४ तृतीय शोधन ,, | सज्जीखार की मात्रा ,, चतुर्थ शोधन ,, वराटिका मारण ,,