रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ २६ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ ताम्र शोधन ४११ | भूनाग सत्व का आमयिक प्रयोग ४३४ द्वितीयताम्र शोधन ,, | मयूर पिच्छ का सत्व पातन ,, तृतीय शोधन ४१२ | अष्टादश तरङ्ग चतुर्थ शोधन ,, | वङ्ग (रांगा) का नाम ४३५ पञ्चम शोधन ,, | वङ्ग के दो भेद ,, छठा शोधन ,, | खुरक का लक्षण ,, ताम्र मारण ४१३ | मिश्रक का लक्षण ४३६ द्वितीय ताम्र मारण ,, | ग्राह्य और हेय वङ्गका स्वरूप ,, तृतीय मारण ४१४ | वङ्ग शोधन का फल ,, चतुर्थ मारण ,, | वङ्ग शोधन ४३७ पञ्चम मारण ४१५ | द्वितीय वङ्ग शोधन ,, छठा मारण ४१६ | तृतीय शोधन ४३८ अमृतीकरण का फल ,, | चतुर्थ शोधन ,, ताम्र के आठ दोष ४१७ | वङ्ग मारण ,, अमृतीकरण ,, | द्वितीय वङ्ग मारण ४३६ द्वितीय अमृतीकरण ४१८ | तृतीय वंग मारण ४४० तृतीय अमृतीकरण ४१६ | चतुर्थ वंग मारण ४४१ ताम्रभस्म का गुण ,, | क्षार शून्य की परीक्षा ४४२ विशेष गुण ४२२ | पञ्चम मारण ,, ताम्र भस्म की मात्रा ,, | वंग भस्म का गुण ४४३ ताम्र भस्म का आमयिक प्रयोग ,, | विशेष गुण ४४४ रविताण्डव रस ४२६ | वंग भस्म के शीत उष्ण होने हृदयार्णव रस ४३० | में हेतु ४४५ त्र्यम्बकेश्वर रस ,, | वंग भस्म की मात्रा ,, सूर्यावर्त रस ४३१ | वंग भस्म का आमयिक प्रयोग ४४६ शूलेभकेशरी रस ४३२ | स्वर्ण वंग का मारण ४४८ भूनाग सत्व पातन ४३३ | द्वितीय मारण प्रकार ४५१ भूनाग सत्व मारण ४३३ | स्वर्ण वङ्ग का गुण ,, भूनाग सत्व का गुण ४३४ | स्वर्ण वंग की मात्रा ४५२