भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

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२७४ रसतरङ्गिणी खण्ड रखकर पुनः ऊपर से दो तोला उक्त भस्म भर कर शराव से अच्छी तरह इसका मुख बन्द कर दें और इस संपुट को लावकपुट में रखकर फूँक लें तो सफेद वर्ण की मल्लभस्म हो जायगी । इस विधि से अवश्य ही संखिया भस्म हो जाती है । इस भस्म के गुण तथा मात्रा शुद्ध सोमल के समान ही समझने चाहिये ॥ १७१-१७६ ॥ अथ सुराष्ट्रजाया नामानि सौराष्ट्रदेशसम्भूता मृत्तिका तुवरी मता । सुराष्ट्रजा च सौराष्ट्री सैव सौराष्ट्रमृत्तिका ॥ १७७ ॥ सौराष्ट्रदेश में उत्पन्न होनेवाली मिट्टी को तुवरी (फिटकरी) कहते हैं । इसी को सुराष्ट्रजा, सौराष्ट्री और सौराष्ट्रमृत्तिका भी कहते हैं ॥ १७७ ॥ अथ स्फटिकारिकाया नामानि स्फटिकारिः स्फुटी चैव स्फटिका स्फुटिकारिका । स्फुटिका फटिका चैव शुभ्रा काङ्क्षी च रङ्गदा ॥ १७८ ॥ दृढरङ्गा रङ्गदृढा तथैव दृढरङ्गदा । तुवरी रङ्गदात्री च कथिता भिषजां वरैः ॥ १७६ ॥ भा.टी.—स्फटिकारि, स्फुटी, स्फटिका, स्फुटिकारिका, स्फुटिका, फांटिका, शुभ्रा, कांची, रंगदा, दृढरंगा, रंगदृढा, दृढरंगदा, तुवरी, रंगदात्री; ये सब फिटकरी के नाम हैं ॥ १७८-१७६ ॥ स्फुटिकारिकायाः परिचयः सौराष्ट्रमृत्तिकैवेह निर्भरं निर्मलीकृता । तच्छोधकैर्जनैर्लोके कथिता स्फुटिकारिका ॥ १८० ॥ सुराष्ट्रजाया नामानि स्फटिकारिकायाश्च। उभयोर्नैर्मल्य एव भेदः, तदेतदाह सौराष्ट्रमृत्तिकैवेति । वह्नौ भर्जनाद् उत्फुल्लितैषा शुद्धयति ॥ १८० ॥ भा.टी.—सौराष्ट्रमृत्तिका में से जब साफ करके फिटकरी को पृथक् किया जाता है तो उसे ही स्फुटिकारिका (फिटकरी) कहने लगते हैं ॥ १८० ॥ अस्या गुणाः काङ्क्षी कषाया कटुका च तिक्ता ख्याता तथोष्णा विषदोषहन्त्री । वीसर्पकण्डूतिहरा च केश्या श्वित्रापहा वै व्रणरोपणा च ॥१८१॥