भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

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एकदशस्तरङ्गः २७७ पञ्चतोलोन्मिते तोये रक्तिपञ्चकसंमिताम् । स्फटिकां द्रावयित्वाथ कुर्वीत कवलग्रहम् ॥ २०६ ॥ नाशयेद्दन्तपैच्छिल्यं मुखपाकञ्च दारुणम् । कण्ठशुण्डीञ्च चिरमाजधिजिह्वाञ्च शोथिनीम् ॥२०७॥ अस्या आमयिकः प्रयोगः—तरुण्याः रक्तपुष्पायाः इति रक्तवर्णगुलाबपुष्प- विशेषस्येति भावः । परिस्रुते सलिले अर्के । अपि च स्फटिकद्रावः परिषेका- ज्जालकाज्जालगर्दभरोगनाशनकरश्चेत्यपि ज्ञेयम् । स्पष्टमन्यत् । स्फटिका गैरिकं च जलपिष्टं सममात्रं विषमज्वरनाशाय । मात्रा गुञ्जमिता । श्वेतस्फटिकाभस्म गुञ्जैकं द्विगुञ्जं वा अजादुग्धनिपीतं उरःक्षतशान्तिकरम् । मधुना विषमज्वरहम्, परमिदं वेगोदयाद्यामैकं प्राक् प्रयोज्यम् । स्फटिका अर्कपत्रसंस्तरचिता भस्मी- कृता ज्वरघ्नी चेति ॥ १८४–२०७ ॥ भा.टी.—मुरदाशंख को समभाग फिटकिरी में मिला बारीक चूर्ण करके व्रणों में छिड़कने से वह भरने लगते हैं । दो मासे फिटकरी को दो पल जल में घोल लें, इस जल से यदि योनि को प्रक्षालन किया जाय तो शीघ्र ही योनि की शिथिलता नष्ट हो जाती है । नकसीर अथवा नाक से रक्त निकलने पर फिटकरी को गो-दुग्ध में घोलकर नस्य लेने से नकसीर बन्द हो जाती है । सुहागा और फिटकरी समभाग में लेकर एकत्र जल में घोल लें, इस जल से सात दिन तक पुरानी विचर्चिका को धोया जाय तो निश्चय वह दूर हो जाती है । किसी स्थान में चाकू आदि शस्त्र से कट जाने पर यदि वहाँ फिटकरी चूर्ण को भर दें तो रक्त निकलना बन्द हो जाता है । तीन रत्ती फिटकरी को पांच तोले शुद्ध जल में घोलकर इस जल की गुरुदर्शित मार्ग से उत्तरबस्ति दी जाय तो सुजाक में मूत्रेन्द्रिय के अन्दर होनेवाला मेह-व्रण (जिसमें से पीप निकलती है ) अच्छा हो जाता है । एक रत्ती फिटकरी चूर्ण को मिश्री या खाँड़ के साथ जल अथवा वासास्वरस अनुपान से सेवन करने से भयंकर रक्तपित्त शान्त हो जाता है । छः रत्ती फिटकरी को पाँच तोले शुद्ध जल में घोलकर इसकी गुद- बस्ति दी जाय तो कुछ दिनों में पुराने बवासीर के मस्से सूख जाते हैं और उनसे खून निकलना बन्द हो जाता है । गुदभ्रंश ( काँच निकलना ) भी दूर हो जाता है । लाल फूल के गुलाब के अर्क ( पाँच तोला ) में चार रत्ती फिटकरी को घोलकर एक साफ शीशी में रख लें, इसमें से दो या तीन बूँद नेत्रों में डालने से आँख का दुखना, पकना, शोथ, लालिमा आदि दूर हो जाते