रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंएकादशस्तरङ्गः २८३ दुग्धपाषाणजं चूर्णं यत्नतस्त्ववचूर्णितम् । रक्तस्रावं निहन्त्याशु त्वभिघातव्रणोद्भवम् ॥ २३६ ॥ दुग्धपाषाणकः ईषदूष्णः नात्यन्तं शीतः । स्पष्टमन्यत् ॥ २३४-२३६ ॥ भा.टी.—स्वच्छ दुग्धपाषाणचूर्ण को यवक्षार के साथ जल में मिला कुछ दिन तक निरन्तर लेप करने से सिध्मकुष्ठ नष्ट हो जाता है । एक रत्ती दुग्धपाषाण- चूर्ण को कुछ दिन दूध या जल के साथ सेवन करने पर सायंकाल को होने वाला मन्दवेगज्वर दूर हो जाता है । दुग्धपाषाण का बारीक चूर्ण करके अभि- घात ( चोट ) तथा व्रणों में छिड़कने से उनमें से रक्तस्राव बन्द हो जाता है । इसके अतिरिक्त यह शरीर के भीतर होनेवाले रक्तस्राव, रक्तातिसार, रक्ताशं, प्रदर आदि रोगों में बहुत लाभ करता है ॥ २३४-२३६ ॥ अथ गोदन्तस्य नामानि गोदन्तिका च गोदन्ता गोदन्तं कथ्यते बुधैः । तत्तु पाषाणजातीयं सौम्यं तालसमं न तत् ॥ २३७ ॥ अथ गोदन्तम्—नेदं तालकजातीयं अपितु तस्मान्नितान्तं भिन्नमिति द्योत- यितुं स्फुटं लौकिकभ्रमं निरस्यति—"तत्तु पाषाणजातीयं सौम्यं तालसमं न तत्" इति ॥ २३७ ॥ भा.टी.—गोदन्तिका, गोदन्ता, गोदन्त ये नाम श्वेता या गोदन्ती के कहे जाते हैं । यह गोदन्त, पाषाणजातीय खनिज द्रव्य है जो सौम्य ( शीतगुण ) होता है, किन्तु हरताल के साथ कोई सादृश्य नहीं रखता है ॥ २३७ ॥ वक्तव्य—गोदन्ती को हरताल या विष मानना अत्यन्त भूल है। यह चूना और गन्धक का यौगिक है। इसको दो मासा से अधिक देने पर भी कोई भी विषैले लक्षण पैदा नहीं होते हैं । प्रकृति में पीतवर्ण गन्धक अधिकांश में श्वेत- गन्धक अर्थात् गोदन्ती से ही रासायनिक क्रिया द्वारा तैयार किया जाता है। आज- कल अनेक समालोचनात्मक दृष्टि से विचार करने पर यह निःसन्देह स्थिर किया गया है कि प्राचीन रसशास्त्रों में जो श्वेत खटिका रूप चौथा गन्धक है वह यही गोदन्ती है । गोदन्ती प्रकृति से तीन चार प्रकार की पायी जाती है। १—कणारूप गोदन्त, २—तालाकृति गोदन्त, ३—पिण्डाकृति गोदन्त, ४—कौशेयाकृति गोदन्त । इनमें से तालाकृति गोदन्त पतले-पतले अनेक पत्र संयोग से बने हुए पिण्ड या हरितालाकृति दिखाई देता है। सम्भवतः इसीके स्वरूप को देखकर इसे हरताल में लिया गया है । परन्तु वास्तव में यह किसी प्रकार भी हरताल नहीं हो सकता है।