भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

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३६२ रसतरङ्गिणी मानता है । किसी ने पीतल न मानकर कान्त लोह, तीक्ष्णलोह और मुण्डलोह मिलाकर अष्ट धातु माने हैं । रसकामधेनु में स्वर्ण, रजत, ताम्र, तीक्ष्ण वंग तथा नाग (सीसा), ये छह ही धातु लिखे हैं । इन्हीं सब बातों को दृष्टि में रखते हुए धातु को लोह शब्द से कहकर सरलता कर दी गयी है । धातूनां सामान्यः प्रथमः शोधनप्रकारः सूचिवेध्यानि पत्राणि धातूनान्तु समाहरेत् । यावद्वह्निप्रभाणि स्युस्तावद्वह्नौ प्रतापयेत् ॥४॥ स्नपयेत्तप्ततप्तानि काञ्जिके तु त्रिधा त्रिधा । तक्रे कुलत्थकथिते गोमूत्रतिलतैलयोः ॥५॥ एवं विशुद्धिमायान्ति स्वर्णाद्याः सप्तधातवः । समासतः समाख्यातमिदं सामान्यशोधनम् ॥६॥ सामान्य शोधनप्रकारः काञ्जिकतक्रादिना । तत्र नागवङ्गयशदानां गालि- तानां निषेको हण्डिकान्तरे इति वक्ष्यते, इतरेषां पञ्चात्मनैव, विशेषशोधनन्तु तत्र तत्र वक्ष्यत एव । एतच्छोधनञ्च कृत्रिमखनिजदोषयोः शान्त्यर्थम् । अथवा कदली- मूलजले सप्तधा निषेकादपि शुद्धिः । उक्तञ्चान्यत्रापि "सर्वलोहानि तप्तानि कदली- मूलवारिणा । सप्तवारं निषिक्तानि शुद्धिमायान्त्यनुत्तमाम् ।" इति ॥४-६॥ भा.टी.—शोधन करने योग्य धातुओं के पतले-पतले सूचिवेध्य पत्र बना कर कोयलों की अग्निमें लालवर्ण होने तक तपायें, अग्नितप से लाल होने पर उन्हें अग्नि में से निकालकर उसी क्षण काञ्जी में बुझा दें, फिर अग्नि में तपाकर काञ्जी में बुझा दें । इस प्रकार अग्नि में तपाकर तीन बार मठे में तीन बार कुलथक्वाथ में तीन बार तिलतैल में बुझायें । इस प्रकार उक्त द्रवों में तीन, २ बार बुझाने से स्वर्ण आदि सातो धातुओं की शुद्धि हो जाती है । संक्षेपतः यह धातुओं की समान्य शोधनविधि है ॥ ४-६ ॥ वक्तव्य—यद्यपि यहाँ पर सब धातुओं के पत्र बना अग्नि में तपाकर लाल करके उक्त द्रवों में बुझाने को लिखा है, परन्तु तीव्रद्रावि वंग, यशद तथा सीसा इन धातुओं को पिघलाकर द्रवों में बुझाना चाहिए । केवल पत्रों को अग्नि पर रख तपाने से नागादि अग्नि में ही नीचे पिघलकर गिर जायेंगे । उक्त प्रकार से धातुओं का शोधन करने से उनमें पाया जाने वाला मिश्रण तथा खनिजदोष दूर हो जाता है । अतएव अशुद्ध मिश्रितदोषयुक्त धातु बहुत सावधानी के साथ शोधन करने पर भी बहुत घट जाता है ।