रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 56, कुल 799 में से
संदर्भ में पढ़ें१४ रसतरङ्गिणी अम्लपञ्चकम् अम्लवेतसजम्बीरलुङ्गनारङ्गनिम्बुकैः । फलपञ्चाम्लकं ख्यातं कीर्तितञ्चाम्लपञ्चकम् ॥१५॥ अपरमम्लपञ्चकम् कोलदाडिमवृक्षाम्लचाङ्गेरीचिञ्चिकारसैः । पञ्चाम्लकं समाख्यातं त्वम्लपञ्चकमेव च ॥१६॥ सर्वेषामम्लजातीनां निम्बूकं गुणवत्तरम् । अम्लवेतसकं वापि त्वम्लिका वा गुणाधिका ॥१७॥ लुङ्गं = मातुलुङ्गम् ॥ १५-१७ ॥ आ.टी.-अमलवेत, जम्भौरी नींबू, बिजौरा नींबू, नारंगी और कागजी नींबू को पञ्चाम्लक या अम्लपञ्चक शब्द से कहा जाता है ॥ १५ ॥ बेर (खट्टा), दाड़िम, वृक्षाम्ल, चांगेरी, इमली, इनके रसों को भी पञ्चाम्लक या अम्लपञ्चक शब्द से कहा जाता है । सब प्रकार के अम्लद्रव्यों में कागजी नींबू विशेष गुणयुक्त होता है । अथवा अमलवेत या इमली भी अन्यों की अपेक्षा अधिक गुणवाली होती हैं ॥ १६, १७ ॥ पञ्चतिक्तकम् गूडूची निम्बमूलत्वक् भिषङ्माता निदिग्धिका । पटोलपत्रमित्येतत् पञ्चतिक्तं प्रकीर्तितम् ॥ १८ ॥ भिषङ्माता = वासकः, निदिग्धिका क्षुद्रभण्टाकी ॥ १८ ॥ आ.टी.--गिलोय, नीम की जड़ की छाल, अडूसा, छोटी कटैली और पटोलपत्र, इन पाँच द्रव्यों को पञ्चतिक्त शब्द से ग्रहण किया जाता है ॥१८॥ पञ्चमृत्तिकाः इष्टिकाचूर्णांकं भस्म तथा वल्मीकमृत्तिका । गैरिकं लवणञ्चेति कीर्तिताः पञ्चमृत्तिकाः ॥१९॥ इष्टिकाचूर्णं = पक्वेष्टिकाच्छोदः ॥ १९ ॥ भा.टी.-ईंट का चूर्ण, साधारण घर की राख, बाँबी की मिट्टी, गेरी और नमक इन पाँच द्रव्यों को पञ्चमृत्तिका (मिट्टी) शब्द से लिया जाता है ॥१९॥ मधुरत्रिकम् आज्यं गुडो माक्षिकञ्च विज्ञेयं मधुरत्रिकम् । मतं त्रिमधुरुञ्चापि तथैव मधुरत्रयम् ॥ २० ॥