भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

पृष्ठ 560, कुल 799 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 560

एकविंशस्तरङ्गः ५३५ पोथकीक्लिष्टवर्त्म होने पर उनमें प्रयोग किया जाता है। इसके द्वारा क्षार कार्य भी किया जाता है, अर्थात् जिस तरह किसी क्षार से व्रणक्षत को जलाया जाता है उसी तरह तुत्थ भी जलाने के काम आता है ॥ ७६-७७ ॥ तुत्थकद्रवस्य निर्माणप्रकारः द्विगुञ्जतश्चतुर्गुञ्जं तुत्थकं निर्मलीकृतम् । परिस्रुते तु सलिले पञ्चतोलसंकमिते ॥ ७८ ॥ निक्षिपेदथ विज्ञाय तुत्थकं सर्वथा द्रुतम् । तुत्थद्रवं प्रयुञ्जीत रसतन्त्रविचक्षणः ॥ ७९ ॥ अथ व्रणादिप्रक्षालनयोग्यतुत्थद्रवनिर्माणप्रकारः-द्विगुञ्जतश्चतुर्गुञ्जमिति गुञ्जा- प्रमाणतारतम्यं दोषाद्यनुसारम् ॥ ७८, ७९ ॥ भा.टी.-दो रत्ती से चार रत्ती तक साफ किया हुआ तुत्थ लेकर उसको पाँच तोला शुद्ध परिस्रुत जल में डालकर घोल लें। जब तूतिया जल में अच्छी तरह घुल जाय तो इस द्रव को विभिन्न रोगों में प्रयोग करें ॥ ७८, ७९ ॥ तुत्थकद्रवस्य आमयिकः प्रयोगः प्रक्लिन्नपूतिमांसानां सुचिरादप्यरोहताम् । तथात्युच्छ्रितमांसानां व्रणानां पूतिगन्धिताम् ॥ ८० ॥ उपदंशफिरङ्गोत्थस्फोटानाञ्चाप्यरोहताम् । रोपणाय तथाशेषदोषनिर्हरणाय च ॥ ८१ ॥ तुत्थद्रवं प्रयुञ्जीत विधानज्ञो भिषग्वरः । द्रवेणानेन धौतास्तु व्रणा रोहन्त्यसंशयम् ॥ ८२ ॥ नेत्रवर्त्मयुगे युक्त्या योजितस्तुत्थकद्रवः । क्लिन्नवर्त्मरुजञ्चापि पोथकीमाशु नाशयेत् ॥ ८३ ॥ अस्य च प्रक्लिन्नमांसादिषु व्रणेषु प्रयोगः । तस्य फलम्-‘द्रवेणानेन धौतास्तु व्रणा रोहन्त्यसंशयम्' इति । अपि च नेत्रयोर्युक्त्या योजितः क्लिन्नवर्त्मपोथक्यादि हरः । युक्तिस्तु निर्मुच्य वर्त्मनी बिन्दुक्षेपकयन्त्रेण तत्र बिन्दुपातनम् । अथवा काचनिर्मितया नेत्रशलाकयाञ्जनम् । अथवा वक्ष्यमाणतुत्थकोदयावर्त्तिप्रयोग- विधानोक्तरीत्या प्रयोज्यो द्रवः ॥ ८०-८३ ॥ भा.टी.-सड़े और दुर्गन्धयुक्त मांसवाले और बहुत देर होने पर न भरनेवाले, और मांस बढ़े हुए, दुर्गन्धियुक्त व्रणों में तथा उपदंश, फिरंगजन्य व्रण जो नहीं भरते हों अर्थात् पुराने बिगड़े हुए व्रणों और आँखों की विकृतियों

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक) · पृष्ठ 560, कुल 799 में से · BharatKosha