भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

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६३२ रसतरङ्गिणी रससिन्दूर मिलाकर इसको पुनर्नवा और गोखरू के कपाय के साथ सेवन कराना चाहिए। साधारण मूत्रकृच्छ्र में प्रवालभस्म या पिष्टी को शतावर और तालमखाने के कषाय के साथ सेवन कराने से लाभ होता है। हाथों की हथेलियों तथा शरीर के अन्य किसी स्थान से स्वेद निकलने पर प्रवालभस्म को यशदभस्म में मिला कर उत्तम मधु के साथ निरन्तर तीन मास तक सेवन करने से अवश्य आराम आता है। क्षयरोग की खाँसी में प्रवालभस्म को अभ्रकभस्म तथा वंशलोचनचूर्ण के साथ मिला वासा-स्वरस अथवा बनप्सा कषाय के साथ सेवन कराने से शीघ्र लाभ दिखाई देता है। छोटे-छोटे-बालकों की तेज खाँसी में प्रवालभस्म सोंठ- चूर्ण, अभ्रकभस्म, रससिन्दूर तथा कण्टकारीचूर्ण में मिलाकर शहद के साथ चटाने से बहुत लाभ होता है। बालकों के ज्वर, कास तथा श्वास अर्थात् ब्रांको- निमोनिया में प्रवालभस्म को अभ्रकभस्म, कायफलचूर्ण, रससिन्दूर तथा भारंगी- चूर्ण में मिलाकर सेवन कराने से शीघ्र आराम आता है। श्वास तथा कास में प्रवालभस्म को शुक्तिभस्म, रससिन्दूर, एवं वंशलोचनचूर्ण में मिलाकर सेवन कराने से शीघ्र आराम आता है ॥ १४३-१५३ ॥ अथ क्षुद्ररत्नगणः वैक्रान्तं सूर्यकान्तश्च चन्द्रकान्तो नृपोपलः । पेरोजकश्च स्फटिकं क्षुद्ररत्नगणो ह्ययम् ॥ १५४ ॥ भा.टी.-वैक्रान्त, सूर्यकान्त, चन्द्रकान्त, नृपोपल (राजावर्त) पिरोज और स्फटिक; इनको (सामान्य) रत्न (मणि) कहा जाता है ॥ १५४ ॥ अथ वैक्रान्तस्य नामानि वैक्रान्तश्चैव विक्रान्तं वैक्रान्तं जीर्णवज्रकम् । कुवज्रं क्षुद्रकुलिशं चूर्णवज्रञ्च तन्मतम् ॥ १५५ ॥ भा.टी.-वैक्रान्त, विक्रान्त, जीर्णवज्रक, कुवज्रक, क्षुद्रकुलिश और चूर्ण- वज्र, ये सब नाम वैक्रान्त के कहे जाते हैं ॥ १५५ ॥ वक्तव्य—वैक्रान्त भी आयुर्वेद के खनिज सन्दिग्ध द्रव्यों में एक द्रव्य है। इसके नाम पर अनेक भिन्न-भिन्न द्रव्य लेने के लिए रसशास्त्रियों का मत- भेद है। पूर्वाचार्यों ने वैक्रान्त का प्रयोग हीरे के स्थान पर लिखा है। अतः यह द्रव्य हीरे का सादृश्य कुछ न कुछ अवश्य रखता है। अन्यत्र 'वैक्रान्तं दग्धहीरकम्' ऐसा लिखा हुआ भी मिलता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि