भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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६६० रसतरङ्गिणी भा.टी.—खस्तिल के फलों को चीरने से जो दुग्ध उपलब्ध होता है उसे अफीम कहते हैं। सायंकाल में फलों में चीर लगाते हैं और सुबह सूर्योदय के पूर्व दुग्ध ग्रहण करते हैं ॥२३६॥ वक्तव्य—अहिफेन के विषय में अनेक प्रकार की कथायें लिखी हुई पायी जाती हैं। जैसे "समुद्रे चैव जायन्ते विषमत्स्याश्चतुर्विधाः। तेभ्यः फेनं समुत्पन्न- महिफेनं चतुर्विधम् ॥" "केचिद्वदन्ति सर्पाणां फेनं स्यादहिफेनकम् । धारणं श्वेत- वर्णाञ्च रक्तवर्णाञ्च जारकम् ॥ सारणं पीतवर्णाञ्च कृष्णवर्णाञ्च मारणम्। विषवद्द्युक्तमं फेनं युज्यते रसकर्मणि ॥" परन्तु ये सब बातें मिथ्या समझनी चाहिए। भारत में सर्वत्र अफीम की खेती की जाती है। बिहार प्रान्त में इसकी उपज अच्छी होती है। यह औषधियों में काम आती है। राजपूताना और मध्य भारत में होनेवाली अफीम को मालवा अफीम कहते हैं जो खाने के काम आती है। अफीम का क्षुप अर्थात् पोस्त का क्षुप वार्षिक (वर्ष में एक बार होनेवाला) २ से ४ फुट ऊँचा और शाखा रहित होता है। इसके कांड से रस निकलता है। इसके पत्ते लम्बे अण्डाकृति, कुछ-कुछ पक्षों में फटे हुए और दन्तुर होते हैं और फूल बड़े, श्वेत, कभी-कभी लाल और बैंगनी। इसको फली एक इञ्च व्यास और एक कोष्ठ की होती है। इसके बीज अनेक, श्वेत और सुन्दर तैलयुक्त होते हैं जिन्हें खशखश कहते हैं। पौधों की फलियों की तरुणावस्था में, रात्रि को एक औजार से सीधे ऊपर से नीचे समानान्तर चीर दिये जाते हैं, जिससे रस निकलकर जम जाता है, जो सवेरे इकट्ठा कर लिया जाता है। इन फलियों में जब तक रस निकलता रहता है चीरा देते रहते हैं। जलीय भाग उड़ जाने पर यह गाढ़ा हो जाता है। इसे कुछ पानी में घोल छान कर गाढ़ा कर लेते हैं, जो अफीम कही जाती है। अफीम पहिले तो नरम और भूरे रंग की होती है, परन्तु पीछे कठोर गहरी भूरी हो जाती है। यह गन्ध में तीव्र, स्वाद में तिक्त (कड़वी) और स्पर्श में कोमल होती है। अफीम गरम पानी में घुल जाती है और धूप से ढीली पड़ जाती है। इस को जलाने से कोयला नहीं बनता और धूप रहित जलती है। बाजार में यह प्रायः अशुद्ध अवस्था में मिलती है। अफीम में अनेक क्षारीय तत्त्व होते हैं जो लगभग १८ हैं। जिनमें से मुख्य Modphine ५ से ७%, Narcotine २ से ८%, Codeine २ से ७% प्रतिशत है।