रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६६२ रसतरङ्गिणी स्वरस मिला दिया जाता है जिससे वह वास्तविक कार्य नहीं करती है और न उसका वास्तविक रंग ही देखने को मिलता है। अतः कच्ची अफीम को लेकर उसे उक्त विधि से अथवा अपक्व अफीम को अदरख रस की २१ भावना देकर काम में लाना चाहिए। खस्तिलनिर्यासनिर्मलीकरणस्य प्रयोजनम् विक्रीयेत विपण्यां यत्त्वफेनं खलु साम्प्रतम्। द्रव्यान्तरयोगाद्धूर्तादिभावितत्वाच्च गर्हितम् ॥२४०॥ खस्तिलस्य तु निर्यासमादायातो भिषग्वरः। स्वयं सुनिर्मलीकृत्य शोधयेच्च प्रयोजयेत् ॥२४१॥ अन्यद्रव्ययोगाद्धेतोः धत्तूरादिरसैर्भावितत्वाच्च विपणिषु उपलभ्यमानं नाभि- लषितसिद्धिकरमिति अपक्वमेव तदादाय तत्साध्यव्याधिषु प्रयोगार्थं निर्मलीकृत्य शोधयितव्यमिति भावः ॥२४०, २४१॥ भा.टी.—आज कल दुकानों में बिकनेवाली अफीम अनेक अन्य द्रव्यों के योग से या धत्तूरा रस क्रिया योग से मिली हुई होने के कारण खराब होती है। अतः वैद्य को अफीम लेकर स्वयं साफ करके शुद्ध करनी चाहिये ॥२४०, २४१॥ अहिफेनस्य शोधनम् निर्मलं त्वहिफेनं तु शृङ्गवेरस्य वारिणा। विभावितं सप्तवारं शुद्धिमायात्यनुत्तमम् ॥२४२॥ शोधनप्रकारः—अहिफेनं आर्द्रकजलेन सप्तधा भावितं शुध्यति इति। “अहिफेनं शृङ्गवेररसैर्भाव्यं त्रिसप्तधा। शुध्यत्युक्तेषु योगेषु योजयेत्तद्विधानतः” इति प्राञ्चः ॥२४२॥ भा.टी.—जल और गोदुग्ध से साफ की हुई अफीम को अदरख के स्वरस की सात भावना देकर सुखाकर रख लेने से अफीम अच्छी तरह शुद्ध हो जाती है ॥२४२॥ अहिफेनस्य गुणाः अहिफेनं सुतिक्तं तु निद्राजनकमुत्तमम्। ग्राहि चैव विशेषेण वेदनाविनिवारणम् ॥२४३॥ सन्निपातप्रशमनं तथा वमिनिषूदनम्। पुरातनं नवं वापि विनिहन्त्यतिसारकम् ॥२४४॥ निहन्त्यामाशयोद्भूतं क्षतमांसार्बुदव्यथाम्। मद्यपानोत्थशोथस्य व्यथाञ्चामाशयाश्रयाम् ॥२४५॥