रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्विंशस्तरङ्गः ६६३ अपानवायोर्भुक्तान्नबहिर्निःसारणात्मिकाम् । क्रियां विवृद्धां चपलां ह्रासयत्यविकल्पतः ॥२४६॥ प्रथमायामवस्थायामतीसारैकलक्षणाम् । विनिहन्ति विशेषेण विसूचीमतिदारुणाम् ॥२४७॥ सातिसारं सप्रलापं पर्याकुलमनिद्रया । निपातयेत्सन्निपातमान्त्रिकज्वरसंज्ञकम् ॥२४८॥ प्रवाहिकाप्रशमनं त्वन्त्रशूलविनाशनम् । मदात्ययहरं चैव तथोन्मादनिबर्हणम् ॥२४९॥ रजःशूलप्रशमनमस्थिभग्नव्यथापहम् । नवामवातशमनं हतमस्थिच्युतौ तथा ॥२५०॥ शुष्ककासप्रशमनं गर्भस्रावनिषूदनम् । राजयक्ष्मसमुद्भूतनिशास्वेदनिषूदनम् ॥२५१॥ हृद्धमन्योगतेः कामं मन्दीकरणकारणात् । अन्त्रोत्थं फुप्फुसोत्थं वा रक्तस्रावं व्यपोहति ॥२५२॥ वाताधिक्याद् बृहद्वेगं कफनिर्गमवर्जितम् । कण्ठकण्डूसमुत्थं वा कासं नाशयति द्रुतम् ॥२५३॥ नाडीनां धमनीनां च यस्माच्च हृदयस्य च । नैसर्गिकीं प्रवृद्धां वा गतिं मन्दयति द्रुतम् ॥२५४॥ तस्माद्धृदयरोगेषु रससन्त्रविचक्षणः । अहिफेनं प्रयुञ्जीत सावधानतया सदा ॥२५५॥ अथ अहिफेनस्य गुणाः-अहिफेनं सुतिक्तं अतितिक्तरसम्, उत्तमं निद्राज- नकम्, विशेषेण ग्राहि, वेदना पीडा व्यथेति यावत्, तस्या विनिवारणम्, नवः नवीनो य आमवातः, तस्य शमनम् ॥ २४३-२५५ ॥ भा.टी.-अफीम खाने में अत्यन्त कड़वी होती है। इसके सेवन से नींद आती है। यह विशेष रूप से ग्राही द्रव्य है और शरीर में होनेवाली वेदनाओं को दूर करती है। सन्निपात को शान्त करती तथा वमन को नष्ट करती है। नवीन अथवा पुरातन अतीसार को शान्त करती है। इसके सेवन से आमाशय में क्षत अथवा मांसाबुंद के कारण होनेवाली पीड़ा शान्त हो जाती है। अत्यधिक मद्यपान करने के कारण होनेवाली आमाशय शोथ पीड़ा को भी यह शान्त करती है। अपानवायु की भोजन को बाहर निकालनेवाली बढ़ी हुई शीघ्र