रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्विंशस्तरङ्गः ७१३ प्रसवोत्तरकाले वा सन्निपातज्वरे खलु । मूत्रानुत्पत्तिहेतूत्थं मूत्ररोधं व्यपोहति ॥ ३६३ ॥ नाडीदौर्बल्यजनितं वक्षस्याकुञ्चनान्वितम् । तारालापयुतं हन्ति श्वासं तु तमकाभिधम् ॥ ३६४ ॥ कफजान् कफपित्तोत्थान् रोगान् वा कफवातजान् । विनिहन्ति विशेषेण ह्यूर्ध्वजत्रुसमाश्रितान् ॥ ३६५ ॥ ग्रन्थिकज्वरसम्भूतं कक्षवङ्क्षणकण्ठजम् । ग्रन्थीनां श्वयथुं हन्ति ज्वरञ्चैव तदाश्रितम् ॥ ३६६ ॥ अथैतस्य गुणविशेषाः तन्त्रान्तरनिर्दिष्टाः अनुभूतचराः प्रकटीक्रियन्ते जगतो हिताय श्वासशमन इत्यादिना । आक्षेपो वातव्याधिविशेषः । अत्यल्पमात्रयेति गुञ्जापादांशादप्यत्यन्तं हीनया । कण्ठशुण्डी गलरोगविशेषः । तारालापयुतमिति तारः सुदीर्घोच्चो य आलापः तद्युतम् । जत्रूर्ध्वसमाश्रितानिति जत्रुः ग्रीवासन्धिः, तदूर्ध्वदेशाश्रितान् । ग्रन्थिकज्वरः ‘Plague’ इति ख्यातः ॥ ३५२–३६६ ॥ भा.टी.—धतूरा श्वास रोग को शान्त करता और कफ को सुखाने में उत्तम गुण रखता है। शरीर में होनेवाले आक्षेप और उन्माद रोग को नष्ट करता है। शरीर से होनेवाले स्रावों को रोकता और रतिशक्ति को बढ़ाता है। बाह्य- योग से नेत्राभिष्यन्द रोग, कर्णशूल, वेदनासहित अर्बुद रोग तथा लसीका-ग्रन्थियों के शोथ को मिटाता है। दाँतों में कीड़ा लगने से होनेवाली व्यथा को कम करता और आमवात रोग को नष्ट करता है। स्तनों में होनेवाले शोथ को शान्त करता और प्रलाप सन्निपात आदि को शान्त करता है। जीवाणुनाशक है और पागल कुत्ते के विष को नष्ट करता है। कमर की पीड़ा को कम करता है और स्त्री के कामोन्माद रोग को नष्ट करता है। उक्त गुण युक्त धतूरा को निम्नलिखित रोगों में वैद्य को विशेष रूप से बहुत ही अल्प मात्रा में प्रयोग करना चाहिये। धतूरा विशेष रूप से, शोथ के कारण होनेवाली शरीर के विविध प्रदेश की और विविध प्रकार की वेदना को शान्त करता है। सन्निपात ज्वर के कारण अथवा प्रसूति ज्वर के कारण होनेवाले अत्यन्त दुर्गन्धित पीत और कृष्णवर्ण मलमिश्रित जल सदृश पतले दस्तोंवाले अतीसार में धतूरा विशेष रूप से लाभ करता है। अत्यन्त भयंकर वेदनायुक्त कण्ठशुण्डी रोग को शीघ्र नष्ट करता है, मसूरिका आदि स्फोटज्वरों में दानों के न निकल सकने के कारण होनेवाले आक्षेप और प्रलाप को शीघ्र धतूरा शान्त करता है। इसी तरह वीसर्पजन्य, ज्वरजन्य