रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकटिवातव्यथां चैव सन्धिवातभवां व्यथाम् । यूकालिक्षादिकं चैव हन्ति केशेषु मर्दनात् ॥३७५॥ धत्तूरफलचूर्णं तु काकोदुम्बरिकान्वितम् । शीलितं तण्डुलाम्भोभिः सारमेयविषं हरेत् ॥३७६॥ सगुडः सार्कदुग्धश्च कृष्णधूतदलद्रवः । शीलितो विनिहन्त्येव सारमेयविषं द्रुतम् ॥३७७॥ धूर्तपत्रं साहिफेनं जलेन परिपेषितम् । लेपनान्नाशयत्याशु सर्वश्वयथुवेदनाम् ॥३७८॥ धत्तूरस्य रोगयोग्यः प्रयोगः—ब्रध्नशोथं वंक्षणसन्धिग्रन्थिशोथम् । तन्नि- दानादि यथा—“अत्यभिष्यन्दिगुर्वन्नसेवनान्निचयं गतः । करोति ग्रन्थवच्छोथं दोषो वंक्षणसन्धिषु । ज्वरशूलाङ्गसादाढ्यं तं ब्रध्नमिति निर्दिशेत्” ॥ चरके तूक्तं “यस्य वायुः प्रकुपितः शोफशूलकरश्चरन् । वंक्षणाद् वृषणौ याति ब्रध्नस्त- स्योपजायते” । निफेनं अहिफेनम् , निशाफेनयुतमिति निशा हरिद्रा, अफेनम् अहिफेनमिति च्छेदः । निगद्व्याख्यातमन्यत् ॥३६६–३७८॥ भा.टी.—धतूरे की जड़ अथवा पत्तों को जल के साथ खूब पीसकर गरम करके पोलटिस बाँधने से ब्रध्नशोथ नष्ट हो जाती है । धतूरे के पत्तों के स्वच्छ रस में रसौंत और अफीम घोंटकर नेत्रों में डालने से भयंकर नेत्राभिष्यन्द में आराम आता है । कान के शूल में थोड़ा सा धतूरपत्रस्वरस को गरम करके कान में डालने से दर्द बन्द हो जाता है । धतूरे के बीजों को जल के साथ खूब पीस कर बनायी गोलियों को कृमिदन्त के छिद्र (खोड़) में रखने से दाँत की पीड़ा नष्ट हो जाती है । स्तनों में शोथ के कारण होनेवाली वेदना को शान्त करने के लिए धतूरे के पत्तों को हरिद्रा तथा अफीम के साथ जल से पीसकर लेप करने से शीघ्र आराम आता है । मांसपेशीगत वातप्रकोप को शान्त करने के लिये धतूर- पत्रकल्क से सिद्ध सरसों के तेल की मालिश से आराम आता है। इसी तैल को कमर की वातपीड़ा, सन्धिवातपीड़ा में भी मालिश करने से आराम आता है । यदि शिर में जूं और लीख हो गयी हों तो इसे शिर के बालों में लगाने से जूं और लीख मर जाती हैं । पागल कुत्ते के विष प्रभाव को नष्ट करने के लिए धतूरपत्रचूर्ण को काकोदुम्बरिकाचूर्ण में मिला चावलों के साथ सेवन कराया जाता है । इसी तरह काले धतूरे के पत्तों के स्वरस में आक का दूध तथा गुड़ मिलाकर कुछ काल उचित मात्रा में सेवन कराने से कुत्ते के विष का प्रभाव