रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७५४ रसतरङ्गिणी जाता है। यदि इनको शुद्ध करना हो तो इस विधि से शुद्ध कर सकते हैं। एरण्डबीजों को तोड़कर उनका छिलका निकालकर भीतर की मज्जा को नारियल के जल में तीन घंटे स्वेदन कर लें। कालीमिर्च को शुद्ध करना हो तो उसे खट्टे मट्ठे में दो एक दिन भिगोकर निकालकर सुखा लेना चाहिए। पिप्पली को शुद्ध करने के लिए उनको चित्रकस्वरस में भावना देकर सुखा लेना चाहिए। निम्बूकबीजशोधनम् अपामार्गकषायेण दोलायन्त्रे तु यामकम्। स्विन्नानि निम्बूबीजानि विशुद्ध्यन्ति विशेषतः ॥५७७॥ भा.टी.— निम्बू के बीजों को लेकर कपड़े में बाँधकर पोटली बना लें। अब इसको दोलायन्त्र में अपामार्ग का क्वाथ भरकर उसमें तीन घंटे तक स्वेदन करके पोटली को निकाल लें। फिर बीजों का छिलका अलग करके उनको सुखा लें। इस तरह निंबूबीज शुद्ध हो जाते हैं ॥५७७॥ हिंगुशोधनम् रामठं समशुद्धाज्यसंयुतं दर्विकागतम्। विपक्कमग्नितापेन शुद्धिमायात्यनुत्तमाम् ॥५७८॥ भा.टी.— एक लोहे की बड़ी चम्मच में हींग के टुकड़े और गोघृत दोनों समभाग डालकर उसको अग्नि में पकायें, जब हींग के टुकड़े फूलकर घी के ऊपर तैरने लगें तो नीचे उतारकर घृत से पृथक् कर सुखा लें। इस विधि से हींग शुद्ध हो जाती है ॥५७८॥ गुग्गुलुशोधनम् चतुर्गुणे गव्यदुग्धे गुग्गुलुं स्वेदयेद् भृशम्। वस्त्रपूतं विधायाथ मलं वस्त्रस्थमुत्सृजेत् ॥५७९॥ दुग्धं शीतं तु विज्ञाय दुग्धपात्रतलस्थितम्। समाहरेद् गुग्गुलुं तु सर्वदोषसमुज्झितम् ॥५८०॥ गुग्गुलुशोधनं मन्दाग्निना विधेयम्। स्पष्टमन्यत् ॥५७९, ५८०॥ भा.टी.—एक साफ मोटे कपड़े में गूगल के छोटे-छोटे टुकड़ों को बाँध- कर उसे दोलायन्त्र या एक पात्र में गूगल से चौगुना दूध भरकर तीव्र अग्नि से उबालें। जब गूगल गलकर दूध में मिल जाय तो पोटली को (जिसमें गूगलमें तिनके, पत्ते, पत्थर, कंकड़ आदि न रह जाय) निचोड़कर अलगकर दें। जब दूध ठंडा हो जाय तो पात्र के तलप्रदेश में जमे हुए गूगल को निकाल लें।