रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ९६ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । डाल दे, इसप्रकार तीन दिन करे फिर निकालकर तीव्र धूपमें सुखा ले। इसप्रकार शोधन किया विष जिस योगमें जितना डालना लिखा हो उतना डाले ॥ ७७ ॥ ७८ ॥ इति विष शोधन ॥ सात उपविष । अर्कस्सेहुण्डधत्तूरलाङ्गलीकरवीरकाः । गुञ्जाहिफेनावित्येताः सप्तोपविषजातयः ॥ ७९ ॥ आक, थोहर, धतूरा, लांगलीकंद, कनेर, गुंजा ( रत्तक ) और अफीम यह सात उपविषोंकी जातियां हैं ॥ ७९ ॥ उपविष शोधन । धत्तूरस्य च यद्बीजमन्यच्चोपविषं च यत् । तच्छोध्यं दोलिकायन्त्रे क्षीरपूर्णेऽथ पात्रके ॥३८० धतूरेके बीज या अन्य उपविष जो शोधन करना हो उसको पोटलीमें बांध दुग्धयुक्त पात्रमें लटका दोलायन्त्रविधिसे पकावे तो शुद्ध होजाते हैं ॥ ३८० ॥ जमालगोटेका शोधन । निस्तुषं जयपालश्च द्विधा कृत्वा विचक्षणः । एतद्बीजस्य मध्यन्तु पत्रवत्परिवर्जयेत् ॥ ८१ ॥ अष्टमांशेन चूर्णेन टङ्कणस्य च मेलयेत् । त्रिरात्रं गोमये क्षिप्त्वा पाच्यं दुग्धेन संप्लुतम् । एवं वै शुद्धिमायाति जैपालममृतोपमम् ॥ ८२ ॥ जमालगोटेके छिलके दूर कर उनकी गिरीकी दो दो दालसी काट- कर अन्दरसे सफेद पत्ती ( जीभी ) दूर कर दे, फिर इनमें आठवां भाग सुहागा मिलाकर पोटली बांध गायके गोबरमें डुबोकर रक्खे तीन दिनके बाद निकाल कर गरम पानीसे धो डाले, फिर पोटलीमें