भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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भाषाटीकासहित । ( ९७ ) बांध दोलायन्त्रविधिसे गोदूधमें पकावे फिर निकाल करके खरलमें बारीक रगडे ( फिर इस कल्कको मिट्टीके ठीकरों या शरावोंपर लेप- कर धूपमें सुखावे जिससे सब चिकनाई शराव शोषण कर ले फिर शरावोंपरसे उतार ले ) यह जमालगोटे शुद्ध और अमृतके समान गुण कारी होते हैं । जिस योगमें जमालगोटे डालने हों यह डालने चाहिये ॥ ३८१ ॥ ३८२ ॥ इति जैपाल शुद्धि ॥ अन्य मतसे जैपालादि बीजोंका शोधन । मूलक्वाथैः कुमार्याश्च जैपालबीजशोधनम् । इन्द्रवारुणिकाक्वाथै राजवृक्षस्य बीजकम् ॥ ८३ ॥ समूलोत्तरवारुण्या धुस्तूरबीजशोधनम् । धात्रीफलरसेनैव पलाशबीजशोधनम् ॥ ८४ ॥ जमालगोटोंकी पत्ती निकाल पोटलीमें बांध घीकुवारकी जड़के क्वाथमें पकावे तो शुद्ध होजाते हैं । अमलतासके बीज इन्द्रायणके क्वाथमें शुद्ध होजाते हैं । ऐसे ही जडसहित इंद्रायणके काथमें धतू- रेके बीज शुद्ध होजाते हैं । आमलेके रसकी भावना देनेसे ढाकके बीज शुद्ध होजाते हैं ॥ ८३ ॥ ८४ ॥ थोहरके दूधका शोधन । चिञ्चापत्ररसे कर्षे वस्त्रपूते पलद्वयम् । स्नुहीक्षीरं रौद्रयन्त्रे भावयेद्यत्नतः सुधीः । द्रवे शुष्के समुत्तार्य सर्वयोगेषु योजयेत् ॥ ८५ ॥ इमलीके पत्रोंका स्वरस वस्त्रसे छना हुआ एक तोला, थोहरका दूध दश तोला इन दोनोंको मिट्टीके कपालमें डाल अग्निपर चढ़ावे जब थोहरके दूधका पतलापन दूर होकर दूध सूख जावे तो उतार ले । यह दूध शुद्ध और विरेचक योगमें डालने योग्य होजाता है ॥ ८५ ॥