भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

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( ११२ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । जयन्ती वा जया वाथ मेहं हन्ति सुराह्वयम् । जयन्ती वा जया वाथ मधुना मेहजिद्भवेत् ॥२६॥ जयावटी अथवा जयन्तीवटीको दूधके साथ सेवन करनेसे पाण्डुरोग और सूजन नष्ट होती है । जयावटी अथवा जयन्तीवटीको चावलोंके जलके साथ सेवन करनेसे सब प्रकारकी अश्मरी और दारुण मूत्र- कृच्छ्र रोग दूर होता है । जयावटी अथवा जयन्तीवटीको गोमूत्रके साथ सेवन करनेसे और गोमूत्रमें पीसकर लेप करनेसे काकणकुष्ठ और गलितकुष्ठ नष्ट होता है । जयावटी अथवा जयन्तीवटीको आठ मासे केतकीकी जड़के साथ जलमें पीसकर सेवन करनेसे सुरामेह नष्ट होता है । जयन्ती अथवा जयावटीको शहदके साथ सेवन करनेसे प्रमेह रोग नष्ट होता है ॥ २३-२६ ॥ लोध्रमुस्ताभयातुल्यं कट्फलञ्च जलैः सह । क्वाथयित्वा पिबेच्चानु मधुना सर्वमेहजित् ॥ २७ ॥ जयन्ती वा जया वाथ गुडैः कोष्णजलैः पिबेत् । त्रिदोषोत्थं हरेद्गुल्मं रसो वानन्दभैरवः ॥ २८ ॥ जयन्ती अथवा जया वटीको लोध, नागरमोथा, हरड़ और काय- फलके क्वाथमें शहद मिलाकर सेवन करनेसे सब प्रकारका प्रमेह रोग नष्ट होता है । जयन्ती अथवा जयावटिकाको गुड और मन्दोष्ण जलके साथ सेवन करनेसे त्रिदोषजनित गुल्मरोग नष्ट होता है । अथवा आनन्दभैरव रसके सेवन करनेसे गुल्मरोग नष्ट होता है ॥ २७॥ २८ ॥ जयन्ती वा जया हन्ति शुण्ठ्या सर्वं भगन्दरम् । जयन्ती वा जया वाथ तक्रेण ग्रहणीप्रणुत् ॥२९॥ जयन्ती वा जया वाथ रसश्चानन्दभैरवः । रक्तपित्ते त्रिदोषोत्थे शीततोयेन पाययेत् ॥ ३० ॥