भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 200, कुल 584 में से

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पृष्ठ 200

( १७४ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । दन्तिबीजानि सर्वाणि चूर्णयित्वा विभावयेत् ॥ भावना पूर्ववद्देया वटीं कुर्याच्च पूर्ववत् ॥ ३३० ॥ पारा, सिंग्रफ, तांबेकी भस्म, सोनामाखीभस्म, शुद्ध तूतिया, वंगभस्म, गंधक, खपरिया, मैनशिल, हरितालभस्म, घनपाषाण ( कांतपाषाण ), गेरू, सुहागा और जमालगोटे इन सब औषधियोंका चूर्ण करके पूर्वोक्त भावनाके द्रव्यों द्वारा पूर्ववत् भावना देकर चनेकी बराबर गोली बना लें । इसको महाज्वरांकुश रस कहते हैं ॥३२९॥३३०॥ सर्वतोभद्र रस । विशुद्धं गगनं ग्राह्यं द्विकर्षं शुद्धगन्धकम् । तोलकं तोलकार्द्धञ्च हिंगुलोत्थरसन्तथा ॥ ३१ ॥ कर्पूरं केशरं मांसी तेजपत्रं लवङ्गकम् । जातीकोषफलञ्चैव सूक्ष्मैला करिपिप्पली ॥ ३२ ॥ कुष्ठं तालीशपत्रञ्च धातकी चोचमुस्तकम् । हरीतकी मरीचं च शृङ्गवेरं विभीतकम् ॥ ३३ ॥ पिप्पल्यामलकञ्चैव शाणभागं विचूर्णितम् । सर्वमेकीकृतं पिष्ट्वा वटीं कुर्याद्द्विगुञ्जिकाम् ॥ ३४॥ अभ्रकभस्म २ कर्ष, शुद्ध गंधक १ तोला, सिंग्रफमेंसे निकाला हुआ पारा ६ मासे, कपूर, नागकेशर, वालछड़, तेजपात, लौंग, जावित्री, जायफल, छोटी इलायची, गजपीपल, कूठ, तालीशपत्र, धायके फूल, दारचीनी, नागरमोथा, हरड़, काली मिरच, सोंठ, बहेड़ा, पीपल और आमला यह प्रत्येक चार चार मासे सबको एकत्र उत्तम रीतिसे पीसकर दो दो रत्तीकी गोलियां बना लेवे ॥३१-३४ ॥ भक्षयेत्पर्णखण्डेन मधुना सितयापि वा । रोगं ज्ञात्वाऽनुपानं च प्रातः कुर्याद्विचक्षणः ॥३५॥

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