भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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भाषाटीकासहित । ( ३ ) आयुर्वेदके ज्ञाताओंने संपूर्ण औषधियें साध्य रोगोंके लियेही कही हैं । परंतु पारद् असाध्य रोगोंकोभी दूर करता है इस लिये यह सब ओषधियोंसे श्रेष्ठ माना है ॥ ५ ॥ हतो हन्ति जरां व्याधिं मूर्च्छितो व्याधिघातकः । बद्धः खेचरतां धत्ते कोऽन्यः सूतात्कृपाकरः ॥ ६ ॥ पारेकी भस्म-बुढापा और सम्पूर्ण वलीपलित आदि रोगोंको दूर करती है । मूर्च्छित पारद् ( रससिंदूर, मकरध्वज आदि ) संपूर्ण व्याधि- योंको नष्ट करता है । और “ जलौका बद्ध ” या “ खेचरी गुटिका” हो जानेपर आकाशमें गमन करनेकी शक्ति देता है। अत एव पारदसे बढकर और कौन ऐसी कृपा करनेवाला हो सकता है ॥ ६ ॥ रसके पर्यायवाचक शब्द । रसेन्द्रः पारदः सूतः सूतराजश्च सूतकः । शिवतेजो रसः सप्त नामान्येवं रसस्य तु ॥·७॥ रसेंद्र, पारद, सूत, सूतराज, सूतक, शिवतेज, रस ये सात नाम पारदके हैं ॥ ७ ॥ शिवबीजो रसः सूतः पारदश्च रसेन्द्रकः । एतानि रसनामानि तथान्यानि यथा शिवे ॥ ८ ॥ अथवा शिवबीज, रस, सूत, पारद, रसेंद्र और जितने नाम शिवके हैं वह सब पारदके जानने ॥ ८ ॥ उत्तम पारदकी परीक्षा । अन्तः सुनीलो बहिरुज्ज्वलो यो मध्याह्नसूर्यप्रतिमप्रकाशः । शस्तोऽथ धूम्रः परिपाण्डुरश्च चित्रो न योज्यो रसकर्मसिद्धौ ॥ ९ ॥ जो पारद् भीतरसे नीलवर्ण हो, बाहरसे उज्ज्वल वर्ण और मध्या-