भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

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( २७० ) रसेन्द्रसारसंग्रह । लेवे । सबको एकत्र पीसकर घृत और शहदमें मिलाकर सेवन करनेसे कामला और पांडुरोग नष्ट होते हैं ॥ २७ ॥ पांडुरोगपर पथ्यापथ्य । शालियष्टिकगोधूमयवमुद्गादयो हिताः । रसाश्च जांगलभवा मधुराः पाण्डुरोगिणाम् ॥ २८ ॥ शालिधान, साँठीधान, गेहूं, जौ और मूंग आदि अन्न, जांगलप्रदे- शके जीवोंके मांंसरस और मधुर रसवाले पदार्थ यह सब पांडुरोगि- योंको हितकारी हैं ॥ २८ ॥ अथ कामलाचिकित्सा । पाण्डुरोगोदिता योगा घ्नन्ति ते कामलामपि ॥२९॥ जो प्रयोग पांडुरोगमें कहे हैं वह सब कामलारोगको भी नष्ट करते हैं ॥ २९ ॥ चन्द्रसूर्यात्मक रस । सूतकं गन्धकं लौहमभ्रकञ्च फलं पलम् । शंखटंकवराटं च प्रत्येकार्द्धपलं हरेत् ॥ ३० ॥ गोक्षुरबीजचूर्णञ्च पलैकं तत्र दीयते । सर्वमेकीकृतं चूर्णं बाष्पयन्त्रे विभावयेत् ॥ ३१ ॥ पटोलपर्पटौ भार्ङ्गी विदारीशतपुष्पिका । दन्ती वासा कुण्डली च काकमाचीन्द्रवारुणी ॥३२॥ वर्षाभूकेशराजञ्च शालिश्च द्रोणपुष्पिका । प्रत्येकार्द्धपलैर्द्रवैर्भावयित्वा वटीं कुरु ॥ ३३ ॥ चतुर्दशवटीं खादेच्छागीदुग्धानुपानतः । गहनानन्दनाथोक्तश्चन्द्रसूर्यात्मको रसः ॥ ३४ ॥