रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३३० ) रसेन्द्रसारसंग्रह । वातकफत्रिदोषजं पित्तोद्भवं गन्धसमुद्भवं नृणाम् । कासं स्वराघातमुरुग्रहं रुजं श्वासं वलासं यकृतं भगन्दरम् ॥६॥ प्लीहाग्निमान्द्यं श्वयथुं समीरणं मेहं भृशं कुष्ठमसृग्दरं क्रिमिम् । शूलाम्लपित्त- क्षयरोगमुद्धतं सरक्तपित्तं वमिदाहमश्मरीम् । निहन्ति चार्शांसि सुलोचनाभ्रकं बलप्रदं वृष्यतमं रसायनम् ॥ ७ ॥ वज्राभ्रकभस्म १ पल, चव्य, बेर, खस, अनार, आमले, अम्लनो- निया और सेंधानमक इन सब औषधियोंको १०-१० पल लेकर एकत्र खरल करके सेवन करनेसे वातज, कफज, त्रिदोषज, पित्तज और दुर्गन्धजनित अरुचि रोग, खाँसी, स्वरभेद, ऊरुस्तम्भ, यंत्रणा, श्वास, कफ, यकृत्, भगन्दर, प्लीहा, मंदाग्नि, शोथ, वायु, प्रमेह, कुष्ठ, प्रदर, क्रिमि, शूल, अम्लपित्त, क्षयरोग, रक्तपित्त, वमन, दाह, अश्मरी और अर्शरोग प्रभृति नष्ट होते हैं । यह बलको बढ़ानेवाला, वीर्यवर्द्धक और रसायन है ॥ ६-७ ॥ अरुचिघ्न रस । ससूतमरुचिघ्नं स्यात्तिंतिडीकगुडोषणम् । मृद्धीका जीरकं कृष्णा मातुलुङ्गाम्लवेतसम् ॥ ८ ॥ इति रसेन्द्रसारसंग्रहेऽरोचकाधिकारः । रससिन्दूर, पक्क इमली, गुड़, काली मिरच, दाख, जीरा, पीपल, बिजौरानींबू और अमलवेत यह सब औषधियां समान भाग लेकर सबको एकत्र पीसकर सेवन करनेसे अरुचि रोग नष्ट होता है ॥ ८ ॥ इति अरोचकाधिकार समाप्त ।