भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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भाषाटीकासहित । ( ३६७ ) फल और जावित्री यह प्रत्येक औषधि छः छः मासे, विधारेके बीज और धतूरेके बीज यह प्रत्येक एक एक तोला और सोनाभस्म ४ मासे लेवे, इन सब औषधियोंको एकत्र मर्दन करके दो दो रत्तीकी गोली बना लेवे । इन गोलियोंके सेवन करनेसे त्रिदोषज सर्व प्रकारके रोग, गलोत्थ रोग, आन्त्रवृद्धि, अतिसार, ग्यारह प्रकारके महाकुष्ठ, बीस प्रकारके प्रमेह, कफवातज श्लीपद, चिरकालका श्लीपद, वंशज श्लीपद, नाड़ीव्रण, व्रण, भगन्दर, खांसी, पीनस, राजयक्ष्मा, बवासीर, मेदरोग, दुर्गंध, रुधिरजनित रोग, सर्व प्रकारका आमवात, जिह्वास्तम्भ, गलग्रह, उदररोग, कर्ण, नासिका, नेत्र और मुखकी जड़ता, सर्व प्रकारका शूल, शिरःशूल और स्त्रीरोग प्रभृति नष्ट होते हैं ॥ १७–२४॥ वटिकां प्रातरैकैकां खादेन्नित्यं यथाबलम् । अनुपानमिह प्रोक्तं मांसं पिष्टं पयो दधि ॥ २५ ॥ वारिभक्तं सुराशीधुसेवनात्कामरूपधृक् । वृद्धोऽपि तरुणस्पर्द्धी न च शुक्रक्षयो भवेत् ॥ २६॥ न च लिङ्गस्य शैथिल्यं न केशा यान्ति पक्कताम् । नित्यं गच्छेच्छतं स्त्रीणां मत्तवारणविक्रमः ॥ २७॥ द्विलक्षयोजनी दृष्टिर्जायते पौष्टिकस्तथा । प्रोक्तः प्रयोगराजोऽयं नारदेन महात्मना ॥ २८ ॥ रसो लक्ष्मीविलासोऽयं वासुदेवो जगत्पतिः । प्रसादादस्य भगवान् लक्षनारीषु वल्लभः ॥ २९ ॥ प्रतिदिन प्रातःकाल नित्य इसकी एक गोली खाय और इसपर मांस, मिष्टान्न ( पक्वान्न ) दूध, दही, जलयुक्त भात अथवा मांडयुक्त भात और मदिरा सेवन करे तो कामदेवके समन स्वरूपवान् हो