भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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भाषाटीकासहित । ( १५ ) लेप करे उसमें पारा बांधकर धान्याम्लमें तीन दिन दोलायंत्रमें पकावे यह स्वेदन संस्कार है ॥ ( २ ) घरका धूम, ईंटका चूर्ण, कालाजीरा, जली हुई ऊन, गुड, सेंधानमक और राई यह पारेसे सोलहवें सोलहवें भाग लेकर सबका चूर्णकर पारेमें मिला कांजी डालकर तीन दिन रगडे इसको मर्दन संस्कार कहते हैं ॥ ( ३ ) त्रिफलेका चूर्ण घीकुमार और चित्रक इन तीनोंमें खरल करके सूखनेपर कांजीसे धोडाले इस प्रकार सात बार इन्हीं द्रव्योंमें रगडनेको मूर्च्छन संस्कार कहते हैं ॥ अथवा पहले जो सप्तकंचुकी हरण विधि कह आये हैं उसको मूर्च्छन संस्कार कहते हैं ॥ ( ४ ) घीकुमारके रसमें चौथाई भाग हलदीका चूर्ण मिलाकर घोटकर डमरुयंत्रमें उडाले इसको उत्थापन संस्कार कहते हैं । अथवा नींबूके रसमें खरल कर धूपमें सुखाकर पारा निकाल ले बाकी रहे पारेको उडाकर निकालले यह उत्थापन संस्कार है ॥ ( ५ ) उर्ध्वपातन और तिर्यक्पातन करनेको पातन संस्कार कहते हैं ॥ ( ६ ) ४६ । ४७ के श्लोकमें जो षण्ढत्वनाशन विधि कही है उसको बोधन संस्कार कहते हैं ॥ ( ७ ) नाकुलीकंद, चिंचिका ( इमली या रक्तक ), वांझककौडेका कंद, भांगरा, नागरमोथे और धतूरेके पत्रोंका स्वरस इनमें तीन दिन रगडनेसे पारा स्थिर होजाता है इसको नियामन संस्कार कहते हैं ॥ ( ८ ) कसीस, पांचों लवण, राई, मिर्च, सुहांजनेके बीज और सुहागा इन सबका चूर्ण धान्याम्लजलमें घोलकर इस पानीमें दोला- यंत्रद्वारा पारेको तीन दिन पकानेसे पारेका दीपन संस्कार होता है॥ यद्यपि पारेके १८ संस्कार होते हैं जो वृहद् रसग्रंथोंमें लिखे हैं । यहांपर केवल ८ संस्कार लिखदिये हैं, अठारह संस्कार यहां ग्रंथ बढ-