भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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भाषाटीकासहित । ( ३९१) शोथं गलग्रहं वृद्धिं श्लीपदं सभगन्दरम् । वृद्धबालकरी चैव मन्दाग्नेरपि दीपनी ॥ ६० ॥ शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक और लोहभस्म यह प्रत्येक औषधि दो दो तोले; त्रिफला, हींग, ताम्रभस्म, कचूर, त्रिकुटा, सुहागा, तेजपात, दारचीना, इलायची, तालीशपत्र, जायफल, लौंग, अजवायन, जीरा और धनियां यह प्रत्येक औषधि एक एक तोला परिमाण लेवे । इन सब औषधियोंको एकत्र बकरीके दूधमें पीसकर एक एक मासेकी गोली बना लेवे । बकरीके दूधके साथ इनमेंसे एक एक गोली सेवन करनेसे आठ प्रकारका शूल, प्लीहा, गुल्म, उदर, अम्लपित्त, आम- वात, पांडु, कामला, शोथ, गलग्रह, वृद्धि, श्लीपद और भगन्दर रोग नष्ट होते हैं । यह औषधि वृद्धको बालकके समान करनेवाली और मन्दाग्निको दीपन करती है। इसे शूलवज्रिणीवटिका कहते हैं॥४६-६०॥ त्रिपुरभैरव रस । भागो रसस्याश्महेम्नो भागो ग्राह्योऽतियत्नतः । तयोर्द्वादश भागानि ताम्रपत्राणि लेपयेत् ॥ ६१ ॥ पचेच्छूलहरः सूतो भवेत्त्रिपुरभैरवः । माषो मध्वाज्यसंयुक्तो देयोऽस्य परिणामजे ॥ अन्ये त्वेरण्डतैलेन हिंगुत्रययुतो रसः ॥ ६२ ॥ शुद्ध पारा १ भाग और गंधक १ भाग दोनोंकी एकत्र कज्जली बनावे । फिर कज्जलीसे बारह गुने तांबेके पत्र लेकर उन पत्रोंपर उक्त कज्जलीका लेप करके मूषामें रखकर गजपुटमें पकावे । पश्चात् इसका चूर्ण बनाकर एक मासे परिमाण औषधि घृत और सहतमें मिलाकर सेवन करनेसे परिणामशूल नष्ट होता है । कोई कोई वैद्य एरण्डीका तेल, हींग और त्रिकुटेके चूर्णके साथ इस औषधिके सेवन करनेकी व्यवस्था करते हैं ॥ ६१ ॥ ६२ ॥