रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
DevanagariHindipublished584 पृष्ठ
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( ३९२ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । रसबलिगगनाकं वेतसाम्लं विषं स्यात्, सवरमिह पृथक्स्याद्भावयेद्द्रसमेतैः । कनकभुजगवल्लीकण्टकारीजयाद्भिः, कमलसलिलवासामुष्टिवज्राम्बुपूरैः ॥ ५३ ॥ अरुणसदृशपाकैर्मातुलुङ्गश्च योज्यः, पटुगण इह तुल्यो भावयेदार्द्रकाद्भिः । दहनवदननाम्ना वल्लमात्रो निहन्ति, प्रबलसकलशूलं तद्विकारानशेषान् ॥ ५४ ॥ पारा, गंधक, अभ्रकभस्म, ताम्रभस्म, अमलवेत, विष और त्रिफला यह सब औषधि समान भाग लेकर धतूरेके पत्ते, पान, कटेरी, भांग, कमल, सुगंधवाला, अडूसा, कुचिला, थूहर और बिजोरा नींबू इन प्रत्येकके रसके द्वारा एक एक भावना देकर फिर उसमें समान भाग लवणवर्ग मिलाकर अदरखके रसके द्वारा सात सात भावना देकर दो दो रत्तीकी गोली बना ले