भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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भाषाटीकासहित । (४९९ ) पित्तनाशकभैषज्यं योगवाहिरसं सुधीः । कुष्ठोद्दिष्टक्रियां सर्वामपि कुर्याद्भिषग्वरः ॥ ४ ॥ इस विसर्प रोगमें समस्त पित्तनाशक औषधि और योगवाही औष- धियोंका प्रयोग करे । तथा कुष्ठरोगोक्त समस्त चिकित्सा करे ॥ ४ ॥ गुडूचीनिम्बजक्वाथैः खदिरेन्द्रयवाम्बुना । कर्पूरत्रिसुगन्धिभ्यां युक्तं सूतं द्विवल्लभम् ॥ विस्फोटं त्वरितं हन्याद्वायुर्जलधरानिव ॥ ५ ॥ गिलोय और नीमकी छालके क्वाथमें; अथवा खैर और इन्द्रजौके क्वाथमें कपूर, दालचीनी, इलायची और तेजपातका चूर्ण डालकर इसके साथ चार रत्ती परिमाण रससिन्दूरके सेवन करनेसे शीघ्र ही विस्फोटकरोग ऐसे नष्ट होता है, जिसप्रकार वायुसे मेघोंके समूह नष्ट हो जाते हैं ॥ ५ ॥ गव्यं सर्पिरुयहं पीत्वा निर्गुण्डीस्वरसं त्र्यहम् । विविधं स्नायुकं