भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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भाषाटीकासहित । ( २७ )

नागरमोथे, वच, चित्रक, गोखरू, कड़वीतूंबी, दंती, चमेली, नाकुलीकंद, सरफोंका, घीकुमार, चाण्डालनीकंद, विषमुष्टी (कुचला), वज्रवली (हडफोड़ी), लाजवन्ती, बंदाल डोडा, लाख, सहदेवी, नीप (कदंब), पीपल, संभालू, चक्रमर्द (पनवाड़), लांगलीकंद, मानकंद, आक, चंद्ररेखा (बावची), रविभक्ता (हुलहुल), काक- माची, श्वेतार्क, विष्णुक्रांता (कोयल), कौवाथोड़ी, वज्री (थोहर), बला, सोंठ, कडवी तोरी, जयंती, वाराहीकंद, हाथीशुण्डी, केलाकंद, मत्स्याक्षी, यमचिंचा, हलदी, दारुहलदी, लाल पुनर्नवा, श्वेतपुनर्नवा, धतूरा, काकजंघा, शतावर, कंचुकी, वांझककोड़ेकी जड़, तिलपर्णी, मण्डूकपर्णी (ब्राह्मी), दूर्वा, मूर्वा, हरड़, तुलसी, गोखरू, मूषक- पर्णी, कर्कटीकंद, वर्गलता (पाठा), मूसली, हींग, गिलोय, सुहां- जना, गिरिकर्णिका (अपराजिता), महाराष्ट्री (जलपिप्पली), मार्कव (भांगरा), सेंधानमक, सरणी (प्रसारणी, पसरन), सोमलता, पीली सरसों, असन (विजयसार), हंसपदी, व्याघ्रपदी, कंटाई, केशु, भिलावे और इंद्रायण यह मारक वर्ग है। इन सब औषधियोंका चूर्ण पारेसे आधा भाग मिलाकर या इनमेंसे जो मिलसके उनअठारह द्रव्योंका चूर्ण पारेसे आधा भाग ले अथवा प्रत्येक द्रव्यका अठारहवां भाग चूर्ण लेकर पारदको मारण, मूर्छन आदि करनेके लिये प्रयोग करे ॥ ९४-१०१ ॥ अम्लवर्ग । अम्लवेतसजम्बीरलुम्बाम्लचणकाम्लकाः । नागरङ्गं तिन्तिडी च चिञ्चापत्रञ्च निम्बुकम् ॥१०२॥ चाङ्गेरी दाडिमश्चैव करमर्दं तथैव च । एष चाम्लगणः प्रोक्तो वेतसाम्लसमायुतः ॥१०३॥ अम्लवेत, जम्बीरी, बिजौरा, चणेका खार, नारंगी, तिन्तिडीक, इमलीके पत्ते, नींबू, चांगेरी (चुका) दाड़िम (खट्टा अनार), और कमरख यह अम्लवर्ग कहा है ॥ १०२ ॥ १०३ ॥