रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
DevanagariHindipublished584 पृष्ठ
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भाषाटीकासहित । ( ५१७) जम्बीररसयोगेन वटीं कुर्याद्विचक्षणः । गुञ्जाद्वयप्रमाणान्तु खलु वैद्यः प्रयत्नतः ॥ १५ ॥ आर्द्रकस्य रसेनैव भक्षयेदुष्णवारिणा । निहन्ति सर्वरोगांश्च भास्करस्तिमिरं यथा ॥ १६ ॥ जायफल, सुहागा, त्रिकुटा और सिंग्रफ इन सब औषधियोंका चूर्ण प्रत्येक एक एक भाग लेकर जम्भीरी नींबूके रसमें दो प्रहरतक खरल करके दो दो रत्तीकी गोली बना लेवे । इन गोलियोंको अदरखके रस और गरम जलके साथ सेवन करनेसे सर्व प्रकारके स्त्रियोंके रोग ऐसे
- नष्ट होते हैं जैसे सूर्यके द्वारा अन्धकार ॥ १४-१६ ॥ दूसरा गर्भचिंतामणि रस । रसं तारं तथा लौहं प्रत्येकं कर्षमानतः । कर्षत्रयं तथा चाभ्रं कर्पूरं वङ्गताम्रकम् ॥ १७ ॥ जातीफलं तथा कोषं गोक्षुरञ्च शतावरी । बलातिबलयोर्मूलं प्रत्येकं तोलकं शुभम् ॥ १८ ॥ वारिणा वटिका कार्या द्विगुञ्जाफलमानतः । सन्निपातं निहन्त्याशु स्त्रीणाञ्चैव विशेषतः ॥ गर्भिण्या ज्वरदाहञ्च प्रदरं सूतिकामयम् ॥ १९ ॥ शुद्ध पारा, रूपाभस्म, लोहभस्म यह प्रत्येक एक एक कर्ष परि- माण, अभ्रकभस्म ३ कर्ष, कपूर, वंगभस्म, तांबाभस्म, जायफल, जावित्री, गोखुरू, सतावर, खिरेंटीकी जड़ और कंघीकी जड़ यह प्रत्येक औषधि एक एक तोला परिमाण लेवे । इन सब औषधियोंको एकत्र जलमें पीसकर दो दो रत्तीकी गोली बना लेवे । इन गोलियोंके सेवन करनेसे सन्निपात, स्त्रीरोग, गर्भिणीज्वर, दाह, सूतिका और प्रदररोग नष्ट होते हैं ॥ १७-१९ ॥