रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(५४६) रसेन्द्रसारसंग्रह । पारा, गन्धक, सुहागा, नागकेशर, कपूर, जावित्री, लौंग, तेजपात और सोनेकी भस्म यह प्रत्येक औषधि एक एक कर्ष परिमाण लेवे; कृष्णाभ्रकभस्म ४ तोले, तालीशपत्र, नागरमोथा, कूट, बालछड, लौंग, दालचीनी, इलायची, त्रिकुटा, त्रिफला और गजपीपल यह प्रत्येक औषधि दो दो कर्ष परिमाण लेवे, इन सब औषधियोंको एकत्र पीसकर पीपलके क्वाथमें सात भावना देकर यथोचित मात्राकी गोली बना लेवे। दालचीनीके चूर्ण और सहतके साथ इस औषधिके सेवन करनेसे अनेक प्रकारके रोग नष्ट होते हैं। विशेष करके यह खांसीको दूर करता है। इससे वातज, पित्तज, कफज और त्रिदोषज रोग, हृद- यशूल, पार्श्वशूल, शिरःशूल, स्वरभेद, क्षय, कुष्ठ, कफ, वातरक्त, रक्त- पित्त और कासरोग नष्ट होते हैं । यह बृहच्छृङ्गाराभ्र श्रीकृष्णने कहा है ॥ ९९-१०५ ॥ इति रसायनाधिकार वाजीकरणाध्याय समाप्त । इति पटियालाराज्यस्थवैद्यरत्न पं० रामप्रसादराजवैद्यकृतभाषाटीकायां तृतीयखण्डः समाप्तः ॥ ३ ॥