रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५२ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । खपरिया नेत्ररोगनाशक, छेदी, क्षयरोगनाशक और भारी है ॥ ४ ॥ इति खर्परविधान । तुत्थ ( नीलाथोथे ) के नाम । तुत्थकं तु शिखिग्रीवं हेमसारं मयूरकम् ॥ ५ ॥ तुत्थ ( तुत्थक, तूतिया, सस्यक ) शिखिग्रीव, हेमसार, ( ताम्रो- पधातु ) और मयूरक यह नीलाथोथेके नाम हैं ॥ ५ ॥ तूतियाशोधनमारण । विष्ठया मर्दयेत्तुत्थं मार्जारककपोतयोः । दशांशं टंकणं दत्त्वा पाच्यं मृदुपुटे ततः। पुटं दद्यात्पटुक्षौद्रैः किल तुत्थविशुद्धये ॥ ६ ॥ तूतियेको बिल्ली और कबूतरकी विष्ठामें खरल करके तूतियेसे दशवां भाग सुहागा मिलाकर शराव संपुटमें रख कपड़मिट्टीकर सुखा ले फिर जंगली उपलोंकी हलकीसी पुट देवे । फिर निकाल कर चतुर्थांश नमक और किंचित् शहदके साथ घोटकर हलकी पुट देवे ( कोई " पुटं दध्ना पुटं क्षौद्रैः " दहीमें एक पुट शहदमें एक पुट देवे ऐसा लिखते हैं ) तो तूतिया अवश्य शुद्ध होजाता है ॥ ६ ॥ ओतोर्विष्ठासमं तुत्थं सक्षौद्रं टंकणांघ्रियुक । त्रिधा संपुटितं शुद्धं वान्तिभ्रान्तिविवर्जितम् ॥ ७ ॥ दूसरी विधि-नीलेथोथेके समानभाग बिल्लीकी विष्ठा और शहदमें चतुर्थांश सुहागा मिलाकर खरल करे और शराव संपुटकर मृदुपुटकी आंच देवे, इसप्रकार तीन पुटें देनेसे वमन और भ्रांति दोषसे रहित शुद्ध तुत्थ भस्म तैयार होजाता है ॥ ७ ॥ १ तुत्थ ( तूतिया ) तांबेका उपधातु हैं । खपरिया-जिस्तका उपधातु है, खपरियाके अभावमें जिस्तकी भस्म लेवे ।