रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें: ७ : रसखान के कृष्ण भारतीय साहित्य मे कृष्ण के स्वरूप का उल्लेख अत्यन्त प्राचीन काल से होता चला आ रहा है। वैदिक साहित्य मे कृष्ण का जिस रूप मे उल्लेख हुआ है, उससे उमे न तो अवतार की संज्ञा दी जा सकती है और न देवता की ही। महाभारत मे कृष्ण के अवतारी रूप का अवश्य उल्लेख मिलता है पर इस रूप के वर्णन की सीमा कम ही है, अर्थात् इस रूप मे इनका वर्णन थोडा ही हुआ है। महाभारत के अनन्तर कृष्ण की गणना पूर्ण अवतारो मे होने लगती है। गोपाल-रूप मे उनकी उपासना की पद्धति प्रचलित करना पुराणकाल की ही देन है। हरिवंश-पुराण मे कृष्ण के स्वरूप का सबसे अधिक विस्तार और वर्णन पाया जाता है। इस पुराण मे कृष्ण के चरित को गोपियो से आबद्ध किया गया है। 'विष्णु-पर्व' के १२८ अध्यायो मे कृष्ण की जीवन-गाथा वर्णित है जिसमे कृष्ण के चरित के अनेक पहलुओ पर प्रकाश डाला गया है। यथा – 'पूतनावध, शकटवध, ममलार्जुन-पतन, माखन-चोरी, कालिय-मर्दन, धेनुक वध प्रलम्ब-वध, गोवर्धन-धारण इत्यादि। कृष्ण की इन लीलाओ का वर्णन करते समय पुराणकार ने यथास्थल प्रकृति के भी मनोरम चित्रण प्रस्तुत किये हैं। इसके अतिरिक्त पद्म पुराण, वायुपुराण, वामनपुराण, सूर्य पुराण, गरुड-पुराण और विष्णुपुराण, मे भी कृष्ण से सम्बद्ध अनेक गाथाओ का वर्णन किया गया है। पद्मपुराण मे अध्याय ६६ से ७२ तक श्री कृष्ण के महात्म्य का वर्णन है और अध्याय ७२ से ८३ तक वृन्दावन आदि के महत्त्व का तथा कृष्ण की लीलाओ का विवेचन किया गया है। इसी पुराण मे गोपियो के अध्यात्मपक्ष और उनकी उत्पत्ति के विषय मे भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। द्वारिका, गोकुल, मथुरा, वृन्दावन आदि का भी सुन्दर वर्णन है तथा द्वादश वनो का भी उल्लेख है। इस अध्याय के श्लोक ८८ से १०२ तक कृष्ण के सौन्दर्य का अत्यन्त मनोरम चित्रण किया गया है। कृष्ण भक्त साहित्य पर इस पुराण का काफी प्रभाव है। पुष्टिमार्गीय आचार्यो ने इसमे से अनेक बातो को तो ज्यो का त्यो ही अपना लिया है। वायुपुराण मे स्यमन्तक मणि की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन करके फिर कृष्ण जन्म का वर्णन किया गया है। इसके