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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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६८ रसखान-ग्रन्थावली

आए हैं। एकादश स्कन्ध मे भी दो गीत आये है—एक पिंगला का और दूसरा एक भिक्षुक ब्राह्मण का। पिंगला का गीत निर्वेद-गीत है जो ससार के कटु अनुभवो से उत्पन्न अन्तर्वेदना का अभिव्यजन करता है। सात्विक और सदाचारी होने पर भी दुनिया के हाथो अपमानित होने वाले ब्राह्मण भिक्षुक के गीत मे भी वेदना की झलक है। कृष्ण की पत्नियो का गीत दशम स्कन्द के ६०वे अध्याय मे है। उनका मन भगवान की लीला मे इतना तन्मय हो जाता है कि वे अपने को भूल जाती है। सासारिक अनुभवो का ज्ञान लुप्त ह जाता है और आत्म-विभोरता की अनिर्वचनीय दशा मे उनके हृदय-ह्रद से अनायास ही भावधारा वह निकलती है। समस्त प्रकृति उन्हे कृष्णमयी लगतो है और वे प्रकृति के सब पदार्थों को सम्बोधित करके उनका कृष्ण से सम्बन्ध स्थापित करती है। वे यह भी भूल जाती है कि कृष्ण उनके समीप हैं। गोपी गीतो का वर्णन तो वर्णनातीत है। उनके पांचो गीतो मे अनुपम प्रेम की झलक है। प्रतीत होता है हृदय वाणी के साथ लिपटा हुआ चला आया है। उपर्युक्त विवेचन से निम्नलिखित निष्कर्ष निकलते हैं— १ कृष्ण के दो रूप है—सगुण कृष्ण और निर्गुण कृष्ण। २ कृष्ण का सौन्दर्य अमित है। ३ कृष्ण और गोपियो मे घनिष्ठ प्रेम-सम्बन्ध है। ४ कृष्ण अनेक प्रकार की लीलाएँ करते हैं। रसखान ने भी कृष्ण के स्वरूप मे इन्ही विशेषताओ को प्रतिष्ठित किया है। सगुण कृष्ण सिद्धान्तत कृष्णभक्त-कवि कृष्ण का निर्गुण रूप ही स्वीकार करते हैं, पर व्यवहारत उन्हे कृष्ण का सगुण और साकार रूप ही मान्य है। इसका कारण यह हे कि भक्ति के लिए किसी साकार आलम्बन की आवश्यकता होती है, क्योकि निराकार आराध्य पर मन की एकाग्रता प्रतिष्ठित नही हो सकती। सूरदास के शब्दो मे— 'रूप रेख गुन जाति जुगति बिनु निरालम्ब मन चकृत धावै। सब विधि अगम विचारहि ताते सूर सगुन लीला पद गावै ॥' इस सगुण कृष्ण मे कृष्णभक्तो ने अनेक प्रकार की विशेषताओ का समावेश किया है। ये विशेषताएँ ही कृष्ण की विविध लीलामो के नाम से