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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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समीक्षा भाग ११७ नारद से सुनि व्यास रहे पचि हारे तऊ पुनि पार न पावै । ताहि अहीर की छोहरियाँ छछिया भरि छाछ पै नाच नचावै ॥' इस सवैये मे 'स', 'अ' 'द', 'प', और 'घ' वर्ग की अनेक बार आवृत्ति है । अतः यहाँ कोमलावृत्ति से युक्त वृत्यनुप्रास है । इसी प्रकार- 'गावै गुनि गनिका गंधरब औ सारद सेष सबै गुन गावत ।' मे 'ग' और 'स' वर्ण की अनेक बार आवृत्ति होने के कारण वृत्यनुप्रास है । वृत्यनुप्रास के अन्य उदाहरण ये है- १ 'साज समाज सबै सिरताज औ छाज की बात नही कहि आवै ।' - - २ 'सेष सुरेस दिनेस गनेस अजेस धनेस महेस मनावौ । ३. 'है कुछ कचन के कलसा न ये आम की गाँठ मढीक की चाम मे ।' ४. 'लाडली लाल लसै लखियै अलि पुंजनि कुंजनि मै छवि गाढी ।' ५ 'बालन लाल लिये बिहरै छहरै वर मोरपखी सिर ठाढी ।' 'मोतिन माल बनी नट के, लटकी लटवा लट घूँघरवारी । अग ही अग जराव लसै अरु सीस लसै पगिया जरतारी । पूरब पुन्यनि ते रसखानि सु मोहिनी मूरति आनि निहारी । चार्यौ दिसनि को लै छबि आनि कै झाँके झरोखे मै बाँके बिहारी ॥' इस सवैये मे 'त, न, ल' वर्ग दन्त्य स्थान के, 'ट और र, मूर्धन्य स्थान के 'प ब, म' औष्ठ्य स्थान के है। अतः यहाँ श्रुत्यनुप्रास है । ५. यमक- जहाँ एक ही शब्द की दो बार आवृत्ति हो, किन्तु आवृत्त शब्द भिन्नार्थक हो, वहाँ यमक अलकार होता है । यह आवृत्ति तीन प्रकार से हो सकती है- १. जहाँ दोनो शब्द सार्थक हो । २. जहाँ दोनो शब्द निरर्थक हो । ३. जहाँ एक शब्द सार्थक औन एक निरर्थक हो । रसखान के काव्य मे तीनो प्रकार के यमक पाये जाते है । 'बैन वही उनको गुन गाइ औ कान वही उन बैन सो सानी । हाथ वही उन गात सरै अरु पाइ वही जु वही अनुजानी । जान वही उन आन के सग औ मान वही जु करै मनमानी । त्यौ रसखानि वही रसखानि जु है रसखानि सो है रसखानी ॥' इस सवैये की अंतिम पक्ति मे 'रसखानि शब्द की आवृत्ति है । दोनो

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