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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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समीक्षा भाग १२१ साँची कहैं जिय मै निज जानि कै जानति है जस जैसो लयौ है । लोग लुगाई सबै ब्रज माँहि कहै हरि चेरी को चेरो भयो है ॥' यहाँ पर 'जस जैसो लयौ है' मे काकु के द्वारा यह बताया गया है कि वे बहुत बदनाम हो गए है । अत काकु वक्रोक्ति अलकार है । अर्थालंकार रसखान जैसे भावुक कवि की भाषा मे अर्थालंकारो का प्रवाह आ जाना स्वाभाविक है । इनके द्वारा प्रयुक्त कुछ अर्थालंकारो के उदाहरण प्रस्तुत किये जा रहे है । १. उपमा — उपमान और उपमेय के सादृश्य वर्णन मे उपमा अलंकार होता है । रसखान ने इस अलकार का बहुत मात्रा मे और बहुत कुशलता से प्रयोग किया है । यथा— 'सुनियै सबकी कहिये न कछू रहियै इमि या भव-बागर मै । करियै व्रत-नेम सचाई लिये जिनते तरियै भव-सागर मै । मिलियै सबसो दुरभाव बिना रहियै सतसंग उजागर मै । रसखानि गुबिन्दहि कौ भजियै जिमि नागरि कौ चित्त गागर मै ॥' भगवद्-भजन के लिए नागरी के चित्त की एकाग्रता का सादृश्य दिखलाया गया है । अत यहाँ उपमा अलंकार है । इसी प्रकार— 'लाडली लाल लसै लखियै अलि पुंजनि कुंजनि मै छबि गाढी । ऊजरी ज्यौ बिजुरी सी जुरी चहूँ गुजरी केलि-कला सम काढी । त्यौ रसखानि न जानि परै सुखमा तिहुँ लोकन की अति बाढी । बालन लाल लिये बिहरै छहरै बर मोरपखी सिर ठाढी ।' 'ऊजरी ज्यौ बिजुरी सी जुरी चहूँ गुजरी केलि-कला सम काढी' मे उपमा अलंकार है । इस अलंकार के अन्य उदाहरण ये है— १ सुन्दर हास सुधानिधि सो मुख मूरति रंग सुधारस-सानी ।' २. 'ऐचे आवत धनुष से छूटे सर से जाहि ।' ३ 'जा रसखानि बिलोकत ही सहसा ढरि राँग सो अंग ढर्यो है ।' ४ 'तिरछी वरछी सम मारत है दृग-वान कमान सुकान लग्यो ।' ५ 'जाको लसै मुख चन्द समान सुकोमल अंगनि रूप लपेटी ।' ६ 'चन्द सो आनन मैन मनोहर बैन मनोहर मोहत हौ मन ।'