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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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१५८ रसखान ग्रन्थावली दोहा कहा करै रसखानि को, कोऊ चुगुल लवार । जो पै राखनहार है, माखन चाखनहार ॥४॥ शब्दार्थ—चुगुल = चुगलखोर । लवार = झूठा, दुष्ट । राखनहार = रक्षक । माखनमाखनहार = श्रीकृष्ण । अर्थ—श्रीकृष्ण जिसके रक्षक हैं, उनका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता, इस भाव को प्रकट करते हुए रसखान कहते हैं कि यदि श्रीकृष्ण मेरे रक्षक हैं तो मेरा कोई भी चुगलखोर तथा दुष्ट व्यक्ति कुछ नही बिगाड़ सकता । विशेष— १. 'जो पै राखनहार है, माखन-चाखनहार' मे यमक अलकार है । २. कहते हैं कि बादशाह अकबर ने रसखान को दीने-इलाही में दीक्षित होने के लिए कहा, किन्तु ये दीने-इलाही में सम्मिलित न होकर कृष्ण-भक्त बन गये । तब किसी व्यक्ति ने बादशाह से आकर इनकी चुगली की और इन्हे कठोर दण्ड देने का परा- मर्श दिया । इस घटना की प्रतिक्रिया-स्वरूप रसखान ने उपर्युक्त दोहे की रचना की । पाठान्तर—कहा करै रसखान को, लपट लोग लवार । जो पत राखनहार है, माखन-चाखनहार ॥ तुलना—१. 'जो प राखि है राम तो मारि है कोरे ।' —तुलसीदास २. रहिमन को कोउ का करै, ज्वारी चोर लवार । जो पत राखनहार है, माखन-चाखनहार ॥ —रहीम दोहा विमल सरल रसखानि, भई सकल रसखानि ॥ सोई नव रसखानि को, चित चातक रसखानि ॥५॥ शब्दार्थ—विमल = शुद्ध । रसखानि मिलि = कृष्ण से मिलकर । रसखानि = कृष्ण ।