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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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व्याख्या भाग १६३

सवैया

ब्रह्म मै ढूँढ्यौ पुरानन गानन बेद-रिचा सुनि चौगुने चायन । देख्यौ सुन्यौ कबहुँ न कितूँ वह कैसे सरूप औ कैसे सुभायन । टेरत हेरत हारि पर्यौ रसखानि बतायौ न लोग लुगायन । देखौ दुरौ वह कुज-कुटीर मै बैठौ पलोटत राधिका पायन ॥१२॥

शब्दार्थ—पुरानन गानन=पुराण के गीतो मे । चायन=चाव से । कितूँ=कही भी । सुभायन=स्वभाव । टेरत=पुकारता हुआ । हेरत= खोजता हुआ । लुगायन=स्त्रियो ने । दुरौ=छिपा हुआ । पलोटत राधिका पायन=राधा के पैर दबा रहा है ।

अर्थ—कृष्ण की प्रेमाधीनता का वर्णन करते हुए रसखान कहते है कि मैने ब्रह्म को पुराणो के गीतो मे ढूँढा, वेद-ऋचाओ को चौगुने चाव से इसी- लिए सुना कि शायद उन्ही से ब्रह्म का पता चल जाये । मेरे सारे प्रयत्न निष्फल हुए । मैने उसे न तो कही सुना और न कही देखा । मै यह भी नही जान पाया कि उसका स्वरूप और स्वभाव कैसा है । उसे पुकारते हुए, उसकी- खोज करते हुए मै थक गया और किसी भी नर या स्त्री ने उनका पता नहीं बताया । अन्त मे वह मुझे कुज-कुटीर मे छिपकर बैठे हुए राधा के पैरो को दबाता हुआ दिखाई दिया ।

सवैया

कस कुढ्यौ सुनि बानी अकास की ज्यावनहारहि मारन धायौ । भादव साँवरी आठई को रसखान महाप्रभु देवकी जायौ । रैनि अँधेरी मे लै वसुदेव महावन मे अरगै धरि आयौ । काहु न चौजुग जागत पायौ सो राति जसोमति सोवत पायौ ॥१३॥

शब्दार्थ—बानी अकास=आकाशवाणी । ज्यावनहारहि=जन्म लेने वाला ही, देवकी के गर्भ से उत्पन्न होने वाला ही । भादव साँवरी आठई को=भादौ की कृष्ण अष्टमी को । अरगै=धीरे-धीरे, चुपचाप । चौजुग= चारो युगो मे—सतयुग, द्वापर, त्रेता और कलियुग । जागत=जागृत अवस्था ।

अर्थ—कृष्ण-जन्म का वर्णन करते हुए रसखान कहते है कि जब कस ने यह आकाशवाणी सुनी कि देवकी के गर्भ से उत्पन्न होने वाला पुत्र ही तुझे