भारतकोश
रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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१८० . रसखान-ग्रन्थावली है जो कृष्ण के हाथ से माखन-रोटी झपटकर उड़ गया । विशेष—१. कृष्ण की बाल-लीला का सुन्दर एव स्वाभाविक वर्णन है । २. 'वा छवि को रसखानि बिलोकत वारत काम कला निज कोटी' मे व्यतिरेक अलकार है । पाठान्तर—चतुर्थ पंक्ति का यह पाठ भी मिलता है काग के भाग कहा कहिए हरि हाथ सो ले गयौ माखन-रोटी । तुलना— 'सोभित कर नवनीत लिए । घुटुरुनि चलत रेनु तन मण्डित, मुख दधि लेप किए । चारु कपोल, लोल लोचन, गोरोचन-तिलक दिए । लट-लटकनि मनु मत्त मधुप-गन मादक मधुहि पिए । कठुला-कंठ, ब्रज केहरि-नख, राजत रुचिर हिए । धन्य सूर एको पल इहि सुख, का सत कल्प जिए ॥ —सूरदास रूप-माधुरी सवैया मोतिन माल बनी नट के, लटकी लटवा लट घूँघरवारी । अँग ही अँग जराव लसै अरु सीस लसै पगिया जरतारी ॥ पूरब पुन्यनि ते रसखानि सु मोहिनी मूरति आनि निहारी । चार्यो दिसानि की लै छवि आनि कै झांके झरोखे मै बाँके विहारी ।३३। शब्दार्थ—लट=केश-राशि । जराव=जड़ाऊ आभूषण । जरतारी= जरीवाली । अर्थ—कोई गोपी अपनी सखी से कृष्ण की शोभा का वर्णन करती हुई कहती है कि उस नटवर कृष्ण के गले मे मोतियो की माला पड़ी हुई है। घूँघरदार केश-राशि लटक रही है। अंग के प्रत्येक भाग मे जडाऊ आभूषण और सिर पर जरी वाली पगड़ी सुशोभित है । रसखान कहते है कि पूर्व जन्म के पुण्यो के कारण ही इस मोहिनी मूर्ति के दर्शन हुए है। चारो दिशाओ की शोभा लेकर बाँके कृष्ण आकर तभी झरोखे मे झाँकने लगे । विशेष—कृष्ण की रूप-माधुरी का परम्परागत वर्णन है ।