रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंव्याख्या भाग २२३ तुमने हँसी-हँसी मे मेरा हार ले लिया है, लेकिन ध्यान रखो, यदि इसका जर सा भी धागा टूट गया तो सिर्फ इसके एक मोती के लिए तुम सारे व्रज के बाजार मे बिकते फिरोगे । सवैया काहू को माखन चाखि गयौ अरु काहू को दूध दही ढरकायौ । काहू को चीर लै रूख चढ़यौ अरु काहूको गुजघरा छहरायौ । मानै नही बरजे रसखानि सु जानियै राज इन्हें घर आयौ । आव री बूझैँ जसोमति सो यह छोहरा जायौ कि मेव मगायौ ॥ १०६॥ शब्दार्थ—ढरकायौ=बिखेर दिया । गुजछरा=गुंजो की माला । छह- रायौ=तोड़ दी । बरजे=रोकने पर मेव=लूट मार करने वाला । अर्थ—कृष्ण की शरारतो से तग आकर गोपियाँ परस्पर उपालम्भ देती हुई कहती है कि यह कृष्ण हमे बहुत तग कर रहा है। किसी का मक्खन छीनकर उसे खा लिया, किसी की दही बिखेर दी और दूध बिखेर दिया । किसी का वस्त्र लेकर पेड पर चढ गया । किसी की गुजो की माला तोड दी । रसखान कहते है कि रोकने पर भी यह अपनी आदतो से वाज नही आता । ऐसा जान पडता है कि इन्ही के घर का राज्य आ गया हो । हे सखियो ! आयो, और यशोदा जी से यह चलकर मालूम करे कि तुमने यह पुत्र उत्पन्न किया है या लूटमार करने वाला मेव । विशेष—कृष्ण जी विविध लीलाओ का भावपूर्ण वर्णन है । मुरली प्रभाव कवित्त दूध दुह्यौ सीरो पर्यौ तातो, न जमायौ कर्यौ, जामन दयौ सो धर्यौ धर्यौई खटाइगौ । आन हाथ आन पाइ सबही के तब ही ते, जब ही ते रसखानि ताननि सुनाइगौ । ज्योही नर त्यौहो नारी तैसीयै तरुन वारी, कहिये कहा री सब ब्रिज विललाइ गौ । ज्योही नर त्योही नारी तैसीयै तरुन वारी, कहिये कहा री सब ब्रज बिललाइ गौ । जानियै न माली यह छोहरा जसोमति को, बाँसुरी बजाइ गौ कि विष बगराइ गौ ॥१०६॥ शब्दार्थ—तातो=गर्म । जामन=दूध को जमाने के लिए दही का जो