रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
पृष्ठ 297, कुल 368 में से
संदर्भ में पढ़ें२८० रसखान-ग्रन्थावली सवैया अति लाल गुलाल दुकूल ते फूल अली । अलि कुंतल राजत है। मखतूल समान के गुज छरानि मैं किसुक की छवि छाजत है ॥ मुकता के कदव ते अव के मौर सुने सुर कोकिल लाजत है। यह आवनि प्यारी जु की रसखानि वसत-सी आज विराजत है ॥१६७॥ शब्दार्थ-अली=सखी । अलि=भ्रमर । कुंतल=केश । मखतूल= काला रेशम । छरानि मैं=डोरियो मे । अर्थ-कोई गोपी अपनी सखी से राधा के सौन्दर्य का वर्णन करती हुई कहती है कि हे सखि ! उसका अत्यन्त लाल गुलाल के समान दुकूल गुलाब के लाल फूल की भाँति शोभायमान है । उसकी काली केशराशि भोरो के समान सुशोभित है । काले रेशम की डोरियो मे बँधे हुए गुज पलाश-पुष्प की भाँति शोभा सम्पन्न है । उसके मोती कदव और आम की मजरियो के समान शोभायमान है । उसकी वाणी मे इतना माधुर्य है कि उसके वचनों को सुनकर कोयल भी लजा जानी है । इस अपनी प्यारी और आनन्द की खान राधा की शोभा वसन्त श्री के समान प्रतीत हो रही है । विशेष-यमक, उपमा, छेकानुप्रास और साग रूपक अलंकार । सवैया तन चन्दन खौर कै बैठी भटू रही आजु सुधा की सुता मनसी । मनौ इन्दुवधून लजावन को सब जानिन काढि घरी गन सी ॥ रसखानि विराजति चौकी कुचौ बिच उत्तमताहि जरी तन सी । दमकै दृग वान के घायन को गिरि सेत के संधि के जीवन सी ॥१६८॥ शब्दार्थ-सुधा की सुता मनसी=सुधा की मानस-पुत्री । इदुववून= चन्द्रमा की पत्नियो तारिकाओ को । लजावन=लज्जित करने के लिए । गन सी=गणश्री, अपने समूह की सात्विक छटा । चौकी=हार के बीच का चदा । उत्तमताहि=सौन्दर्य को । संधि=बीच । जीवन-सी=जलाशय की भाँति । अर्थ-कोई गोपी अपनी सखी से राधा की सुन्दरता का वर्णन करती हुई कहती है कि हे सखि ! अपने शरीर पर चन्दन लगाकर बैठी हुई वह सुधा की मानस पुत्री राधा ऐसी प्रतीत हो रही है, मानो चन्द्रमा की पत्नियों