रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसमीक्षा भाग १५
यह कथन समस्या का सरल समाधान नही, वरन् समस्या को और उलझा देने वाला है । इस कथन से उपस्थित समस्याये ये हैं— १. रसखान का अभिप्राय किस गदर से है ? यह गदर कब हुआ ? २. रसखान ब्रज मे कब आये ? ३. रसखान की प्रेयसी कौन थी जिसे ये ठुकराकर ब्रज आये ? ४. 'प्रेमवाटिका' की रचना करते समय रसखान की आयु क्या थी ? हिन्दी-विद्वान् उपर्युक्त प्रथम दो प्रश्नो को तो प्रायः उपेक्षित कर गए हैं । 'प्रेमवाटिका' के रचना-काल को सर्वाधिक महत्त्व देकर इसके आधार पर रस- खान के जो विभिन्न काल निर्णीत किए गए है, वे इस प्रकार है— १ 'शिवसिंह-सरोज' के लेखक शिवसिंह ने इनका जन्म संवत् १६३० माना है । २. 'शिवसिंह-सरोज' के मत को आधार मानकर ही बाबू राधाकृष्णदास ने 'सूरसागर' की भूमिका मे रसखान का जन्म संवत् १६३१ स्वीकार किया है । ३ पं० किशोरीलाल गोस्वामी ने स्व-सम्पादित 'प्रेमवाटिका' के द्वितीय संस्करण मे रसखान का समय सोलहवी शताब्दी निश्चित किया है । ४. 'रसखान और घनानंद' नामक कृति के सम्पादक बाबू अमीरसिंह ने पं० किशोरीलाल गोस्वामी के मत को ही मान्यता प्रदान की है । ५. मिश्रबन्धुओं ने 'मिश्रबन्धु-विनोद' में रसखान का जन्म संवत् १६१५ में और देहावसान संवत् १६८५ मे माना है । ६ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने रसखान के केवल कविता काल का उल्लेख किया है जो संवत् १६४० के उपरांत है । ७. डॉ० रामकुमार वर्मा ने संवत् १६७१ को ही रसखान का कविता- काल माना है । ये मत मुख्यतः 'प्रेमवाटिका' के रचना काल पर ही आधृत हैं । कुछ विद्वानो ने 'दिल्ली के गदर' के आधार पर रसखान के समय का निर्णय करने के प्रयास किये हैं । श्री अमृतलाल शील ने दिल्ली की इस दुर्घ- टना को नादिरशाह के भीषण आक्रमण से जोड़कर रसखान का समय गोस्वामी विट्ठलनाथ से १५० वर्ष पश्चात् माना है । पर शील जी अपने मत