रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसमीक्षा भाग १७ भयंकर रूप से फैल गया, जिसकी लपेट में सूरवंश के पठानों का सर्वनाश हो गया था । इस लगातार दो वर्षों के युद्ध के कारण दिल्ली नगर श्मशानवत् हो गया था । कहने का तात्पर्य यह है कि रसखान ने संवत् १६१२ की घटना से त्रस्त होकर अपने प्राण रक्षणार्थ या संसार से एकदम विरक्त होकर दिल्ली छोड़ ब्रजवास किया । इस तथ्य में सन्देह का कोई कारण नहीं है ।' इस आधार पर कहा जा सकता है कि रसखान का जन्म संवत् १५६० ई० के आसपास हुआ होगा, क्योकि दिल्ली छोड़ते समय इनकी अवस्था बीस- बाईस वर्ष की होगी । रसखान ब्रज में कब आये ? यहां पर यह प्रश्न भी विचारणीय है । डॉ० याज्ञिक के अनुसार वे संवत् १६१२ मे दिल्ली छोड़कर तुरत ब्रज में आ गये थे, परन्तु तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह मत शुद्ध प्रतीत नहीं होता । 'मूल गुसाईं चरित' के अनुसार रसखान ने संवत् १६३४ से १६३७ तक अर्थात् तीन वर्ष तक यमुना तट पर राम-कथा का श्रवण किया । इसका अभिप्राय यह है कि इस समय तक इनमें कृष्णभक्ति का प्रभाव प्रस्फु- टित नहीं हुआ था । रसखान के दीक्षा-गुरु श्री विट्ठलनाथ जी का गोलोकवास- काल संवत् १६४२ है । इसका अर्थ यह हुआ कि संवत् १६३७ से १६४२ के अन्तराल मे ही रसखान कृष्णभक्ति में दीक्षित हुए और तभी ये ब्रज में जाकर बसे । जिस मानवती के मान की उपेक्षा करके रसखान ब्रज मे आकर बसे, यह मानिनी कौन है ? इस प्रश्न के उत्तर मे रसखान से सम्बद्ध सभी साधन मौन हैं । कुछ विद्वानों का अनुमान है कि यह मानवती रसखान की कोई प्रेमिका होगी । केवल अनुमान का आधार लेकर इस विषय मे इससे अधिक कुछ नही कहा जा सकता । रसखान का जन्म-समय निर्धारित कर लेने के उपरांत अब यह कहना कठिन नहीं कि जब इन्होंने 'प्रेमवाटिका' की रचना की, तब इनकी आयु ८१ वर्ष की थी, अर्थात् ये काफी लम्बी आयु तक जीवित रहे । अतः अनेक विद्वानों की यह मान्यता भी असंगत प्रतीत नहीं होती कि ये लगभग ८५ वर्ष तक जीवित रहे । इस आधार पर इनका देहावसान संवत् १६७५ के लगभग माना जा सकता है ।