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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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२२ रसखान-ग्रन्थावली = सवावो (पुण्यकर्मों का फल ) ने ज़हूर (प्रत्यक्षीकरण) किया। यानी (अर्थात्) ब्रिज चंद महाराज ने उस सुरूप सोभायमान ब्रिज सुंदर से कि मोर मुकुट सर पर, बनमाला पहने हुए, जेवरात (आभूषण) हरेक उजू (प्रत्येक अंग) मे विराजमान, फूल जा बजा (जहाँ तहाँ) गुँथे हुए, लिवास (पहिचान) ज़र्क वर्क (तडक भडक वाला) का शोभित, एक हाथ मे मुरली और दूसरे हाथ में घडी, गो चराते है, दरसन हुए। बमूजिब (अनुसार) देखने इस रूप माधुरी और दिलरुबा (चितचोर, प्रेमपात्र) के कुछ हालत (दशा) और ही हो गई । इस रूप मे महव (तल्लीन) होकर बेहोश (मूर्च्छित) जमीन पर गिर पडे । मुरशिद (धर्मगुरु, पीर) हमराह (रहपंथी) था। गश (मूर्च्छा) समझकर दरपए इलाज (चिकित्सा का इच्छुक) हुआ और पुकारा कि आँखे खोलो। रसखान जी ने कहा कि उनको उसी वक्त (समय) सब उलूम (विद्याएँ) व मतालिब (अर्थ समूह, व्याख्याए) जाहिर (व्यक्त) व बातिन (अन्तर्गत, अंतरंग) व शायरी से वह (काव्यकला-सम्पन्न) हो गया था। कवित्त मे उस मनोहर मूर्ति का, जो देखी थी, मान (वर्णन) करके आखिर (अं त मे) कहा कि आँखे क्या खोलू, वह मूर्ति दिल मे बस गई है। मुरशिद (पीर) ने फिर कहा कि कावे (मक्का-स्थित एक मंदिर) को चलो। रसखान जी ने जवाब दिया कि कैसा काब और कैसा किब्ल (मक्का का वह स्थान जहाँ काला पत्थर स्था- पित है और जिसकी ओर मुँह कर नमाज पढ़ी जाती है) जो है सो सब जहाँ मौजूद (उपलब्ध) है। अब मैं कहाँ जाता हूँ ? ब्रिज का हो चुका। और एक कवित्त मे बयान (वर्णन) किया कि अगर, आदमी जिस्म (शरीर) मुझको मिलेगा तो ब्रिज के ग्वाले और लोगो मे रहूँगा और अगर चरिन्द (पशु) हुआ तो नद बाबा को गौ बछडो मे और अगर सग (पत्थर) हुआ तो गिरिज (गिरि- राज गोवर्धन) का और अगर परंद हुआ तो ब्रिज के दरखतो (वृक्षो) का। मुरशिद (पीर) को इन कलामात (वचनो) से ताजुव्व (आश्चर्य) हुआ और चाहा कि रथ पर डालकर जबरदस्ती (बल पूर्वक) ले जाऊँ। रसखान जी भाग- कर वन मे जा छिपे और बिरन्दावन मे वास करके हजारहः (सहस्रो) कवित्त विरन्दावन के, व सुभाव (स्वभाव, गुण) व शोभा प्रिया-प्रियतम के तसनीफ (पुस्तक लिखकर) भेट किए। और लिवास बैस्नवी धारन किया। माला