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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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समीक्षा भाग २६ करती है, जिसके गुणो का गान शेषनाग, गणेश, शिव, सूर्य, इन्द्र आदि निर- न्तर करते रहते है, वेद जिसे अनादि, अनंत, अखड, अछेद्य, अभेद्य आदि विशेषणो से विभूषित करते है, योगी, यति, तपस्वी जिसके लिए निरन्तर समाधि लगाये रहते हैं, उसी कृष्ण को अहीर की छोकरियां थोडी-सी छाछ के लिए नचाती है । इस प्रकार रसखान ने पूर्ण स्पष्टता के साथ कृष्ण के अलौकिकत्व का प्रतिपादन किया है । ३. अनन्य भाव—भक्त का अपने आराध्यदेव के प्रति अनन्य भाव होता है, अर्थात् उसके लिए उसका आराध्य ही सर्वोपरि तथा सर्वश्रेष्ठ है । उसकी इच्छा केवल उसे ही प्राप्त करने की होती है । उसके अतिरिक्त अन्य सारी वस्तुएं उसकी दृष्टि मे नगण्य है, भले ही वे कितने ही महत्त्व की क्यो न हो । सूरदास ने भी कृष्ण के प्रति अपने अनन्य भाव की भक्ति को व्यक्त करत हुए कहा है कि कृष्ण को छोडकर अन्य देवो की भक्ति करना कामधेनु को छोड़- कर छेरी को दुहना है, अथवा परम गगा को छोडकर जलप्राप्ति के लिए अन्यत्र कूप खोदना है । रसखान ने भी इसी अनन्य भाव को व्यक्त करते हुए कहा है कि चाहे कोई शेष, सुरेश, दिनेश, गणेश, प्रजेश, महेश, भवानी की अराधना करके अपने मनोरथो को पूर्ण कर ले, चाहे कोई लक्ष्मी की भक्ति करके बहुत सारा धन एकत्र कर ले, चाहे तीनो लोक रहे या नष्ट हो जाये, पर इनका एकमात्र आधार कृष्ण है और कृष्ण को छोडकर ये ससार के और किसी पदार्थ की अभिलाषा नही करते । इस अनन्य भाव के पीछे कृष्ण की भक्त-वत्सलता मुखरित है । जो कृष्ण द्रौपदी, गणिका, गृद्ध (जटायु), अजा- मिल, अहिल्याबाई, प्रह्लाद आदि भक्तो का उद्धार करने वाले है, उनकी शरण मे पहुँचकर आवागमन के दुखो से छूट जाना स्वाभाविक ही है । कृष्ण अपने भक्तो का निरंतर ध्यान रखते है और उनकी रक्षा के लिए सदैव सन्नद्ध रहते है, अत किसी भी व्यक्ति के लिए ऐसे कृष्ण ही सच्ची सम्पत्ति है, ससार का ऐश्वर्य तो दुखद और नश्वर है । कोई भी मनुष्य, चाहे वह कितना ही वैभव-सम्पन्न क्यो न हो, पर यदि वह कृष्ण-भक्ति से विमुख है तो उसकी सम्पूर्ण सम्पन्नता व्यर्थ और निस्सार है । ४. मिलन—इस शीर्षक से सम्बन्धित छदो के अन्तर्गत रसखान ने राधा-