रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३८ रसखान-ग्रन्थावली का अनेक प्रकार से वर्णन किया गया है । गोपियां कृष्ण के सौन्दर्य मे ही नहीं वरन् उनकी वक्र दृष्टि भी उन्हे प्राकुल किये रहती है । जिस गोपी ने भी कृष्ण की दृष्टि को देख लिया, वह फिर कृष्ण से पृथक न हो सकी, भले ही उसे लोक-लाज को तिलांजलि देनी पडी, सास और ननद के त्रासो को सहना पड़ा । कृष्ण की दृष्टि मे ही कुछ ऐसा जादू है कि वह एक वार भी जिस गोपी की ओर देख लेता है, उसी के मन को चुरा लेता है । ६. मुसकान माधुरी—प्रेम के व्यापार मे जितना महत्त्व वक-विलोचन का है, उतना ही मुसकान के माधुर्य का भी है । गोपियो को वशीभूत करने वाले जहाँ कृष्ण के अन्य गुण है, वहाँ मुसकान का माधुर्य भी है । जिसने भी इस मुसकान को देख लिया, यह फिर उसके दिल मे ऐसी गडी कि निकाले से नहीं निकली । इस मुसकान का कोई मूल्य भी तो नहीं, संसार के समस्त रत्नागार इस पर न्यौछावर किये जा सकते है । खरिक मे जाकर कृष्ण की मुसकान देखने वाली गोपी की जो दशा होती है, उसका वर्णन करती हुई एक गोपी अपनी सखी से कहती है कि हे सखि ! अभी-अभी वह गौशाला मे गाय का दूध निकालने के लिए गई थी, लेकिन वह अपने हाथ के दूध के पात्र को फेंक- कर पागल-सी होकर वापम आ गई है । उसकी दशा को देखकर कोई गोपी तो यह कहती है कि उसे किसी ने छल लिया है, कोई कहती है कि वह स्तब्ध हो गई है, कोई कहती है कि वह डर गई है, कोई कहती है कि वह अंधी हो गई है । उसको अच्छा करने के लिए सास अनेक प्रकार के व्रतो को करने का सङ्कल्प करती है, ननद दौड़-दौड़कर सयानो को बोलकर लाती है । सारी सखिया उसकी मूर्च्छा को पहचानकर हंसती है और कहती है कि इसने आनन्द-सागर कृष्ण की वही मुस्कराहट को देख लिया है और यह उसी का प्रभाव है । एक अन्य गोपी अपनी सखी से कृष्ण की मुसकान के प्रभाव का वर्णन इन शब्दो मे करती है कि हे सखि ! वह कामदेव के समान मधुर वाणी बोलती है । उसके शरीर पर पीला वस्त्र सुशोभित है । उसके शरीर की कान्ति इस प्रकार चमकती और दमकती है, मानो काले बादलो मे बिजली चमक रही हो । उसके मुख का सौन्दर्य और मुसकान कुलांगनाओ की लज्जा को नष्ट करने मे पूर्णतया समर्थ है ।