रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६ रसखान-ग्रन्थावली है, पर रसखान के इस विषय में केवल दो छंद ही प्राप्त हैं। एक छंद में यशोदा जी का विलाप है और दूसरे छंद में कृष्ण द्वारा नाग पर विजय कर लेने के कारण ब्रज-वासियों की प्रसन्नता को व्यक्त किया गया है । १६. चीरहरण — चीरहरण-लीला के अन्तर्गत रसखान का केवल एक छंद प्राप्त है । १७. प्रेमासक्ति — इस लीला के अन्तर्गत रसखान के ११ छंद उपलब्ध हैं । इन छंदों में कृष्ण के सौन्दर्य ने, उनकी क्रियाओं ने और उनकी मुरली की वशी- करण ध्वनि ने गोपियों को इतना आकृष्ट कर लिया है कि वे बिना कृष्ण के जल-रहित मीन की भांति छटपटाती रहती हैं। अपनी प्रेमावस्था का वर्णन एक गोपी अपनी सखी से करती हुई कहती है कि कृष्ण जब गाये चरा- कर सांझ को घर लौटते हैं तो उनकी मधुर वाणी, तीक्ष्ण कटाक्ष आदि मेरे हृदय पर इतना अधिक प्रभाव डालते हैं कि मैं यह सोचने लगती हूँ कि कितना अच्छा होता, यदि मेरा हृदय पृथ्वी का वह टुकड़ा होता जहां काछनी पहनकर कृष्ण क्रीड़ाएं किया करते हैं। इसी प्रकार एक अन्य गोपी कहती है कि जब से मैंने कृष्ण के मुकुट, मुरली, वनमाला को देखा है, तब से मैं उनमें इतनी आसक्त हो गई हूँ कि कुल तथा लोक की लाज का भी ध्यान नहीं करती । मैं ही क्या, ब्रज की समस्त गोपियों की यही दशा है। प्रेम का यह बंधन इतना दृढ़ हो गया है कि अब चाहे कोई लाख प्रयत्न करे, पर यह टूट नहीं सकता। वस्तुस्थिति तो यह है कि मैं कृष्ण के रंग में ऐसी रंग गई हूँ कि अब मेरे लिए अन्य कोई रंग ही शेष नहीं रह गया है । अतः यह कहना अनुपयुक्त न होगा कि रसखान ने प्रेमासक्ति का जिस प्रकार वर्णन किया है वह अत्यन्त स्वाभाविक, प्रभावोत्पादक एवं परम्परागत है । १८. प्रेम-बंधन प्रेमासक्ति में आकृष्ट होने की भावना अधिक होती है। जब यह आकर्षण दृढ़ रूप धारण कर लेता है और हृदय पर अपना अधि- पत्य जमा लेता है तो बंधन का रूप बन जाता है। कहने का भाव यह है कि प्रेमासक्ति से अगला सोपान प्रेम-बंधन का है। जो गोपियां कृष्ण की ओर आकृष्ट हुई थीं, कालान्तर में वे ही उनके प्रेम में बंदिनी बन गईं । गोपियों की इस दशा का वर्णन रसखान ने बड़े ही कौशल के साथ किया है। गोपियां इस बंधन में इतनी जकड़ गई हैं कि वे प्रीति की रीति में लाज का कोई स्थान